शासन को आखिरकार करीब नौ महीने बाद दमुवाढूंगा की याद आ गई है। शहरी विकास के अपर सचिव नितिन सिंह भदौरिया ने डीएम नैनीताल को पत्र लिखकर सात दिन के अंदर दमुवाढूंगा के संबंध में आवश्यक जानकारी और अभिलेख उपलब्ध कराने को कहा है। इसके साथ ही बंदोबस्ती की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
दमवाढूंगा के लोग लंबे समय से इलाके को राजस्व क्षेत्र घोषित करने की मांग कर रहे थे। वन विभाग दमुवाढूंगा को रामनगर वन प्रभाग के तहत आरक्षित वन भूमि बताता रहा था। यह मामला कोर्ट में भी गया था। इसके बाद शासन ने 680 एकड़ इलाके का सर्वे कराया ।
इसमें 573 एकड़ भूमि को आरक्षित वन भूमि से बाहर कर दिया। इस संबंध में दिसंबर-2015 में नोटिफिकेशन जारी हो गया था। इसके बाद से कोई भी कार्रवाई नहीं हुई थी। अब तथा शासन में इसको लेकर हलचल तेज हुई है।
अपर सचिव ने डीएम को जारी पत्र में कहा है कि 2014 में नगर निगम हल्द्वानी-काठगोदाम का जो सीमा विस्तार किया गया था। उससे संबंधित भूमि सेटेलमेंट का प्रस्ताव एक सप्ताह के भीतर शासन को उपलब्ध कराया जाय।
क्षेत्रवासियों ने आभार जताया
शासन की इस कार्यवाही को लेकर दमुवाढूंगा के पार्षद विजय कुमार पप्पू, गोविंद सिह बिष्ट, महेशानंद, जीवन तिवारी समेत बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने वित्त मंत्री डा. इंदिरा हृदयेश का आभार जताया है। वित्त मंत्री ने डीएम नैनीताल को संबंधित प्रस्ताव नियत समय में ही तैयार कर भेजने का निर्देश दिया है।