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नई पीढ़ी को मोबाइल से ज्यादा मार्शल आर्ट की जरूरतः संजय मिश्रा

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हल्‍द्वानी में प्रेसवार्ता करते फिल्म कलाकार संजय मिश्रा। अमर उजाला
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हल्द्वानी। बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता संजय मिश्रा ने कहा कि जहां नेशनल शब्द लिखा होता है, वहां जाने में उनको खुशी होती है। कहा कि नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में पढ़ाई के दौरान मार्शल आर्ट से परिचय हुआ। मार्शल आर्ट ध्यान और खुद पर काबू पाने का सबसे बढ़िया तरीका है। कहा कि नई पीढ़ी 24 घंटे मोबाइल और सोशल साइट्स पर लगी हुई है, जबकि नई पीढ़ी को मोबाइल से अधिक मार्शल आर्ट की जरूरत है।
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शुक्रवार को अभिनेता संजय मिश्रा नेशनल कराटे एकेडमी में पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे। कहा कि उनका सबसे पसंदीदा नाटक हेमलेट है। हाल ही में उन्होंने ग्वालियर नाम की एक फिल्म की है। वह आम आदमी की कहानी है। इस फिल्म की शूटिंग समाप्त होने के बाद भी वह किरदार से करीब 15 दिन बाहर नहीं आ सके। मिश्रा ने कहा कि जब वह फिल्मों मेें गए तो जो काम मिला, उसे ही करने लगे। इन किरदारों से पैसे की जरूरत भी पूरी हुई है।
2011 के बाद उनके कॅरियर में बदलाव आने लगे हैं। अनारकली आरा वाली में उन्होंने विलेन का किरदार निभाया है। मशान में भी अलग रोल मिला है। कहा कि हिंदी सिनेमा का बेहतरीन समय चल रहा है। अब कोई भी फिल्म बना सकता है। हिंदी सिनेमा को अच्छी कहानी, अच्छे कलाकार और अच्छी फिल्मों की जरूरत है। अभिनेता ने कहा कि बहुत पहले ही हिंदी फिल्म के विलेन को ग्रेड शेड ले लेना चाहिए था। अब स्थिति में बदलाव हो रहा है। कहा कि देश आजाद हुआ तो अच्छे और बुरे में फर्क दिखाने के लिए सिनेमा ने फिल्मों में खलनायक गढ़े।
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