रामनगर की बेटी क्रिकेटर नीलम भारद्वाज।
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रामनगर (नैनीताल)। ‘लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की हार नहीं होती’ ये पंक्तियां रामनगर की युवा क्रिकेटर नीलम पर सटीक बैठती हैं। संघर्ष और चुनौतियों से लड़कर नीलम ने आखिर साबित कर दिया कि जीवन में कोई भी लक्ष्य नामुमकिन नहीं है। आज नीलम के खेल की चारों ओर प्रशंसा हो रही है। पर कम ही लोग जानते हैं कि यहां तक पहुंचने के लिए नीलम ने किस हद तक मुश्किलें झेली लेकिन क्रिकेटर बनने की जिद थी जो धीरे-धीरे जुनून में बदल गई।
बेहद साधारण परिवार की नीलम भारद्वाज के पिता की पिछले साल मार्च में एक हादसे में मौत हो गई। अचानक मुखिया के जाने से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट गया। मां ने नीलम को क्रिकेट से दूर नहीं होने दिया। नीलम की मां पुष्पा देवी ने दूसरे के घरों में काम करके बच्चों का पालन-पोषण किया। नीलम के पास कभी क्रिकेट खेलने के लिए जरूरी सामान तक नहीं था, लेकिन नीलम ने परिवार से मिले हौंसले को अपनी ढाल बनाया और क्रिकेटर बनने की जिद को जुनून में बदला और अभ्यास जारी रखा। नीलम की प्रतिभा को उनके कोच मो. इसरार अंसारी ने बखूबी पहचाना। उन्होंने न केवल नीलम को क्रिकेट की बारीकियां सिखाई बल्कि हर परिस्थितियों में पिता की तरह साथ खड़े रहे। कोच ने ही नीलम को जरूरत के अनुसार क्रिकेट का सामान भी उपलब्ध कराया। नीलम रामनगर रेलवे स्टेशन के पास के पड़ाव में क्षतिग्रस्त मकान में रहती हैं। परिवार में माता पुष्पा देवी, छोटे भाई ओम (12) और सत्यम (10) हैं। बड़ी बहन स्नेहा की शादी पिछले वर्ष हो गई थी। संवाद
मैच जिताऊ पारी के लिए नीलम को दी बधाई
रामनगर (नैनीताल)। नीलम भारद्वाज की एक और शानदार पारी की बदौलत उत्तराखंड ने अंडर-19 वूमेन ट्रॉफी जीत ली। नीलम की शानदार 56 रन की नाबादी पारी से उत्तराखंड ने मध्य प्रदेश को आसानी से हरा दिया। कॉर्बेट क्रिकेट एकेडमी से जुड़ी नीलम के कोच मो. इसरार अंसारी ने बताया कि नीलम ने पूरे प्रदेश का नाम रोशन किया है। नीलम को बधाई देने वालों में नवीन जोशी, दीपक शर्मा, इमरान हुसैन, शाह फैसल, यूनुस अंसारी, शाहनवाज खान, अरविंद चौधरी, मोहन बिष्ट आदि शामिल रहे।
उत्तराखंड की जीत में कुमाऊं छाया
हल्द्वानी। नीलम भारद्वाज रामनगर में रहती हैं। रामनगर के जीजीआईसी में 11 वीं की छात्रा है जबकि अपनी गेंदबाजी से सुर्खियों में आई मीनाक्षी जोशी हल्द्वानी के केंद्रीय विद्यालय में शिक्षा ग्रहण कर रही है। ज्योति गिरी लालकुआं के बिंदुखत्ता में रहकर पढ़ाई और क्रिकेट की बारीकियों को सीखा है। वहीं लक्ष्मी बसेरा, गायत्री आर्या भी कुमाऊं से ही ताल्लुक रखती हैं।