नैनीताल/भीमताल/गरमपानी/ज्योलीकोट। मानसून सीजन शुरू होते ही पहाड़ों का सफर न केवल मुश्किल भरा होता है बल्कि कई बार तो जानलेवा भी साबित होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि बरसात में सड़कों से सटी पहाड़ियां से भूस्खलन के साथ पत्थर गिरते हैं। हर साल ऐसी कई घटनाएं होती हैं लेकिन न तो विभाग और न ही सरकार इससे कोई सबक लेती है।
एनएच के एई एमबी थापा का कहना है कि हल्द्वानी नैनीताल राष्ट्रीय राजमार्ग में खतरे वाले सभी स्थलों में चौड़ीकरण, सुरक्षा के कार्य होने के बाद मार्ग में भूस्खलन, पहाड़ खिसकने, मार्ग धंसाव की संभावना नहीं है।
एनएच के एई एमसी जोशी का कहना है कि ज्योलीकोट-भवाली के मध्य मार्ग पूरी तरह दुरुस्त है और भूमियाधार-खूपी के मध्य एक दो स्थान पर आंशिक रूप से मलबा आने की आशंका है। जिसके लिए विभागए जेसीबी की व्यवस्था करेगा और उम्मीद है कि यातायात में कोई व्यवधान नहीं आएगा।
भवाली डिवीजन लोनिवि के एई एबी कांडपाल का कहना है कि भीमताल रोड में बरसात में सलड़ी में मलबा आता है जिसे हटाने के लिए एक जेसीबी हर समय मौके पर रहती है।
भवाली अल्मोड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग बेहद जानलेवा
गरमपानी। भवाली-अल्मोड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग में सड़क किनारे स्थित पहाड़ियों से बरसात में पत्थर और बोल्डर गिरने से मार्ग बाधित होता है, जिसके चलते अल्मोड़ा, रानीखेत, हल्द्वानी की ओर आने जाने वाले यात्रियों को परेशानी होती है। पाडली की पहाड़ी से तीन जगह पर बरसात में पत्थर-बोल्डरों के साथ भारी मात्रा में मलबा सड़क पर आ जाता है। साथ ही बरसात में रातीघाट, रामगाढ़, दोपाखी, झूला पुल गरमपानी, खैरना बाजार, भौर्या मोड़, लोहाली, जौरासी, नावली, काकड़ीघाट में भी अक्सर मार्ग बंद होने से घंटों लोगों को परेशान होना पड़ता है और मशीनों की मदद से पत्थर बोल्डरों को हटाकर यातायात शुरू कराया जाता है।
एनएच की एक मशीन रहती हैं मलबा हटाने को
मार्ग खोलने के लिए एनएच की ओर से एक जेसीबी रातीघाट से भवाली की तरफ मलबा हटाने के लिए लगी है। वहीं दूसरी मशीन खैरना से क्वारब के बीच के मलबे को हटाने के लिए लगी है। साथ ही 15 जून के बाद मार्ग में दूूूसरी मशीन भूमियाधार में रहेगी। वहीं एहतियात के तौर पर वाहनों की आवाजाही सुरक्षा दृष्टि से रोकी जाती है।
हल्द्वानी-नैनीताल हाइवे की पहाड़ी हैं संवेदनशील
ज्योलीकोट। कुमाऊं की लाइफ लाइन हल्द्वानी-नैनीताल राष्ट्रीय राजमार्ग और ज्योलीकोट कर्णप्रयाग राष्ट्रीय राजमार्ग में भूस्खलन और भू धंसाव का खतरा काफी कम हो गया है। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि पूर्व में संवेदनशील और डेंजर जोन को सुरक्षात्मक बना दिया गया है। एक दो जगहों में आंशिक खतरा बना है लेकिन विभाग इन जगहों पर यातायात को सुचारु रखने के लिए तैयारियों में जुटा है।
बीते दो-तीन वर्षों तक हल्द्वानी नैनीताल हाइवे में गुलाब घाटी, दो गांव के पास, आमपड़ाव, बल्दियाखान के आसपास और ज्योलीकोट-कर्णप्रयाग हाइवे में वीरभट्टी, गेठिया और भूमियाधार के पास कई जगहों में भूस्खलन, चट्टान खिसकने और भू धंसाव का खतरा रहता था, जिससे यातायात प्रभावित होता था।
भीमताल-रानीबाग की पहाड़ियां भी बनी रहती है जानलेवा
भीमताल। भीमताल-रानीबाग मोटर मार्ग पर सलड़ी, क्वैराली, चंदादेवी तक सड़क किनारे की पहाड़ियों से बरसात में पत्थरों के गिरने से दुघर्टनाओं का भय बना रहता है। साथ ही मलबा आने से यात्रियों को परेशान रहना पड़ता है। हालांकि की लोनिवि की जेसीबी पत्थरों और मलबे को हटाकर यातायात सुचारु कराती हैं। लेकिन बरसात में सफर करना जोखिम भरा रहता है।