नैनीताल हाईकोर्ट ने हरिद्वार जिले के थाना झबरेड़ा में 10 अक्टूबर 2026 को दो लोगों पर हुए हमले में नाबालिग के खिलाफ दर्ज एफआईआर को निरस्त करने संबंधी याचिका पर सुनवाई के बाद याचिका को खारिज कर दिया। मामले की गम्भीरता को देखते हुए अदालत ने पाया कि प्रथम दृष्टया एफआईआर के अवलोकन से याचिकाकर्ता के खिलाफ मामला बनता है, जिसके चलते एफआईआर को रद्द नहीं किया जा सकता ।
न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अधिवक्ता की ओर से कहा गया कि याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि वह करीब 14 वर्ष की आयु का एक नाबालिग है, इसलिए उसे गिरफ्तारी से संरक्षण मिलना चाहिए। सरकार की ओर से पेश तथ्यों को रिकॉर्ड पर लेते हुए अदालत ने स्पष्ट किया कि चूंकि याचिकाकर्ता एक नाबालिग है, इसलिए उसे सामान्य आरोपियों की तरह जेल या हवालात में नहीं भेजा जाएगा।
यदि पुलिस द्वारा उसे पकड़ा जाता है, तो उसे तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन से चाइल्ड वेलफेयर केयर पुलिस स्टेशन स्थानांतरित किया जाएगा। इसके बाद, किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश किए जाने तक, जो कि पकड़े जाने के 24 घंटे के भीतर अनिवार्य है उसे किशोर न्याय बालकों की देखरेख और संरक्षण मॉडल नियम, 2016 के नियम 9 के अनुसार केवल ऑब्जर्वेशन होम में रखा जाएगा।