नगर निगम की करोड़ों की जमीन पर लोगों ने कब्जा कर लिया है। इसमें कई सरकारी महकमे भी शामिल है। अब अंदरखाने कब्जेदारों को जमीन बेचकर नगर निगम कड़की दूर करने की योजना बना रहा है। आगामी बोर्ड बैठक में भी इस संबंध में बातचीत हो सकती है।
नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार शीशमहल क्षेत्र में करीब पांच हेक्टेयर बेशकीमती जमीन पर बरसों पहले लोगों ने कब्जा कर लिया। इस कब्जे में बिजली विभाग, पेयजल निगम आदि विभाग भी शामिल रहे। 2013 में निगम ने कड़की दूर करने के लिए इस जमीन का मूल्यांकन कराया, तो सर्किल रेट के हिसाब से उस वक्त जमीन की कीमत 34 करोड़ रुपए आंकी गई थी। सूत्रों के अनुसार उस वक्त एक प्रस्ताव शासन भेजा गया था।
इसमें जमीन को कब्जेदारों को ही बेचकर आय एकत्र करने की बात कही गई थी। अब जब निगम के ऊपर ही कर्मचारियों की करीब 13 करोड़ की देनदारियां है, तो नए सिरे से जमीन को बेचने के प्रस्ताव पर चर्चा शुरू हुई है।
एक अफसर ने नाम ने छापने की शर्त पर बताया कि इस संबंध में सुझाव दिया जा चुका है। आगामी बोर्ड की बैठक में इस पर विचार किया जा सकता है। जमीन का लोगों का मालिकाना हक मिलेगा, तो दूसरी तरफ निगम को इससे करोड़ों रुपए मिलेंगे, जिससे वह आर्थिक संकट दूर कर सकेगा।