भीमताल (नैनीताल)। आपदा ऐसा जख्म दे जाएगी कि लोगों को खुद का घरबार छोड़ दूसरों के घरों में महालक्ष्मी पूजन के साथ दीये जलाने पड़ेंगे।
पिछले महीने दैवी आपदा में भीमताल ब्लॉक की ग्राम पंचायत अलचौना के तोक पांडेछोड़ के 32 परिवारों के घरों में मलबा घुस गया था। इसके बाद से वह घरबार छोड़ रिश्तेदारों और स्कूलों में रात काटने को मजबूर हैं। आपदा से इस बार इन सबकी दीपावली की रौनक फीकी पड़ गई। ग्रामीणों का कहना है कि वह महालक्ष्मी पूजन के दिन घरों के बाहर दीये जलाकर वापस आ जाएंगे। वहीं रामगढ़ के झूतिया और सकुना गांव के साथ ओखलकांडा के थलाड़ी गांव में भी दीपावली की रौनक नहीं है।
पांडेछोड़ के ग्रामीणों की पीड़ा
- आपदा ने हमें दीपावली से पहले अन्य घरों में रहने को मजबूर कर दिया है। दिवाली पर घर के बाहर दीये जरूर जलाएंगे पर घर के अंदर लक्ष्मी पूजन नहीं कर पाएंगे। इस बार दीपावली फीकी पड़ गई। - तुलसी देवी
- इस बार खुशियों का त्योहार दीपावली की रौनक आपदा ने फीकी कर दी है। आपदा ने ऐसा मंजर दिखाया कि दीपावली भी घर में नहीं मना पा रहे हैं। - भवानी देवी
- हर बार दीपावली पर परिवार के साथ लक्ष्मी पूजन और दीये जलाकर खुशियां मनाया करते थे लेकिन इस बार आपदा ने ऐसा कहर बरपाया कि सब उम्मीदें खत्म कर दीं। - जीवन चंद्र
- दीपावली से पहले बहुत अरमान सजाए थे लेकिन अचानक आई आपदा ने दीपावली की रौनक फीकी करने के साथ हमारी उम्मीदों को इस बार खत्म कर दिया है। - सरोज देवी