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वन अनुसंधान केंद्र ने तैयार किया प्रदेश का सबसे बड़ा बायोडाइवर्सिटी पार्क

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हल्द्वानी में रामपुर रोड स्थित वन अनुसंधान केंद्र में बनाया गया डाइनासोर का स्टेच्यू। अमर उजाल - फोटो : HALDWANI
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हल्द्वानी। पौधों के संरक्षण और रिसर्च के लिए लगातार नए नए प्रयोग कर रहे वन अनुसंधान केंद्र हल्द्वानी ने प्रदेश का सबसे बड़ा बायोडाइवर्सिटी पार्क, जैव विविधता उद्यान तैयार किया है। 18 एकड़ के इस उद्यान में देश भर में पाई जाने वाली 500 से अधिक वनस्पतियां संरक्षित हैं। साथ ही जुरासिक पार्क और संग्रहालय भी हैं।
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विलुप्त और दुर्लभ वनस्पतियों के संरक्षण में जुटे वन अनुसंधान केंद्र ने दो साल की मेहनत के बाद एक जैव विविधता पार्क तैयार किया है, जहां आपको प्रकृति की बहुमूल्य संपदा देखने को मिलेगी। यहां 500 से अधिक दुर्लभ और विलुप्त वनस्पतियों की प्रजाति की वाटिका बनाकर उन्हें संरक्षित किया गया है। आध्यात्म और धर्म का संदेश देने के लिए इन वाटिकाओं को नाम भी दिया है। आपको इस बात की जानकारी भी मिलेगी कि मानव शरीर के किस अंग के लिए कौन से वनस्पति का औषधीय महत्व है।
जुरासिक काल की वनस्पतियों की जानकारी के लिए यहां एक जुरासिक पार्क भी तैयार किया है और एक संग्रहालय भी है जिसमें तराई से लेकर हिमालय क्षेत्रों की मिट्टी, पत्थर और जंगली मसालों को संग्रहित किया गया है। अनुसंधान केंद्र जल्द ही इस पार्क को लोगों के लिए खोलने की तैयारी कर रहा है।
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ये सब देखने को मिलेगा अनुसंधान केंद्र में
अनुसंधान केंद्र में जलीय प्रजातियों, औषधीय पौधों, एरोमेटिक प्लांट, बांस, पालम आदि के लिए हल्दू वाटिका, रुद्राक्ष वाटिका, त्रिफला वाटिका, मानव वाटिका, बुद्धवाटिका आदि तैयार की गई है। यहां की दीवारों पर आपको प्रसिद्ध लेखकों और कवियों के साथ ही आध्यात्म का ज्ञान देने वाले श्लोक और आयतें भी मिलेंगी। जुरासिक पार्क में जीवंत दिखने वाले डायनासोर के पुतले और उस समय मौजूद वनस्पतियों को भी आप यहां देख सकते हैं। यहां के तालाब में आपको लाल के साथ ही नीला कमल भी देखने को मिलेगा।
तराई से हिमालय तक की मिट्टी और पत्थर संग्रहित
जैव विविधता की जानकारी लोगों तक पहुंचाने के लिए यहां तराई से लेकर हिमालयी क्षेत्रों में पाई जाने वाली अलग अलग प्रकार की मिट्टी, पत्थर और कैक्टस को भी संरक्षित किया गया है। पेड़ों की कंदराओं और जड़ों से निर्मित कलाकृतियां भी यहां मौजूद हैं।
बटर फ्लाई पार्क बनाने की तैयारी
जल्द ही वन अनुसंधान केंद्र में आपको एक बटर फ्लाई पार्क भी देखने को मिलेगा, इसके लिए वन अनुसंधान केंद्र तैयारियों में जुटा है। वन संरक्षक अनुसंधान संजीव चतुर्वेदी ने बताया कि देश भर में तितलियों की कई प्रजातियां हैं, जिसमें सेकई विलुप्त होने की कगार पर है। तितलियों के संरक्षण के लिए भविष्य में एक बटर फ्लाई पार्क भी बनाया जाएगा। देश भर के सभी राज्यों के प्रतीक वृक्ष को भी यहां एक साथ संरक्षित करने की योजना है।
आटोमैटिक वेदर स्टेशन देगा हर मिनट की सूचना
अनुसंधान केंद्र में एक आटोमैटिक वेदर स्टेशन भी स्थापित किया है, जो हर एक मिनट में हवा का वेग, दिशा, दबाव, तापमान, सोलर रेडिएशन, ओस की मात्रा, वर्षा का अनुपात, और मौसम में नमी की जानकारी देगा।
करीब दो साल की मेहनत के बाद जैव विविधता पार्क तैयार किया गया है, जहां प्रकृति के सभी स्वरूप देखने को मिलेंगे। इसका मूल उद्देश्य वनस्पतियों आदि का संरक्षण करने के साथ ही लोगों तक जैव विविधता की जानकारी पहुंचाना है।
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- संजीव चतुर्वेदी, वन संरक्षक अनुसंधान।
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