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बीमारी का हॉटस्पॉट बना ज्योलीकोट: जल संस्थान की लापरवाही की सजा भुगत रहे ग्रामीण, अब हो सकती है बड़ी कार्रवाई

Tue, 08 Sep 2026 12:09 AM IST
Heera अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल

सार

नैनीताल जिले का ज्योलीकोट क्षेत्र इन दिनों बीमारी का हॉटस्पॉट बना हुआ है। इसके पीछे कोई प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि जल संस्थान विभाग की घोर लापरवाही है। दूषित पानी पीने से आठ गाँवों के 200 से अधिक लोग पीलिया, टाइफाइड और डायरिया से पीड़ित हैं। 
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ज्योलीकोट क्षेत्र - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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नैनीताल जिले का ज्योलीकोट क्षेत्र आज बीमारी का हॉटस्पॉट बना हुआ है तो इसके पीछे कोई प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि जल संस्थान विभाग की घोर लापरवाही है। दूषित पानी पीने से आठ गांवों के 200 से ज्यादा लोग पीलिया, टाइफाइड और डायरिया से पीड़ित हैं लेकिन जिम्मेदार आज भी कागजों में खानापूर्ति कर रहे हैं।

लगातार दूषित पानी की शिकायत करने के बावजूद जब जल संस्थान ने पानी की जांच करवाई, तो उसमें पानी को साफ बता दिया लेकिन वहीं पानी पीने के कारण जब लोगों की स्थिति बेहद खराब हुई, तो उनकी जांच रिपोर्ट में ई-कोलाई बैक्टीरिया मानक से कई गुना पाया गया। ऐसे में विभाग की लापरवाही के कारण लोगों को लगातार गंदा पानी पीना पड़ा जिससे उनकी हालत और बिगड़ गई।

यदि समय पर टंकियों की सफाई, क्लोरीनेशन, पाइपलाइन लीकेज की जांच हो जाती और ग्रामीणों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था कर दी गई होती तो आज यह स्थिति नहीं होती। आज कई परिवार अपने बच्चों को लेकर अस्पतालों की दौड़ लगा रहे हैं और कई बड़े-बूढ़े अस्पताल में इलाज करा रहे हैं।

उन सबकी जो आज स्थिति है, उसका कारण सिर्फ विभागीय अनदेखी है। हालात जब हाथ से निकल गए, तब जाकर विभागीय कार्रवाई में तेजी आई है।

जल संस्थान से स्टेटस रिपोर्ट मांगी गई है कि जब ब्रेकआउट की पहली रिपोर्ट आई, तो टीम ने कितने नमूने लिए और उन नमूनों में से कितने फेल पाए गए, फेल होने पर कीटाणुशोधन के लिए क्या कार्रवाई की गई। इसके अलावा मरीजों की संख्या लगातार जब बढ़ रही थी, तो क्या सीवरेज और लीकेज की जांच की गई। गांव वालों के जो टैंक हैं, उसकी क्लीनिंग करके क्लोरीनेशन करने के बाद क्या दोबारा सैंपल लिए गए। इन सभी बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी गई है। दो-तीन दिनों में रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। - ललित मोहन रयाल, जिलाधिकारी, नैनीताल

निजी अस्पतालों में लुट रहे मरीज, लाखों का बिल

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दूषित पानी से फैले पीलिया और डायरिया ने ज्योलीकोट के लोगों पर दोहरी मार की है। एक तरफ बीमारी से जूझ रहे हैं, दूसरी तरफ इलाज के नाम पर निजी अस्पतालों में लाखों रुपये खर्च करने के लिए मजबूर हैं। सरकारी अस्पताल से मरीजों को रेफर किया जा रहा है और निजी अस्पतालों में आयुष्मान कार्ड भी काम नहीं आ रहा।

ज्योलीकोट क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों में जलजनित बीमारियों ने विकराल रूप ले लिया है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार 200 से ज्यादा लोग ई-कोलाई बैक्टीरिया से संक्रमित पानी पीने से पीलिया, टाइफाइड और डायरिया की चपेट में हैं। आठ गांवों में हेल्थ इमरजेंसी जैसे हालात हैं। तीन लोगों की मौत भी हो चुकी है। वहीं, अन्य बीमार लोग इलाज के लिए इधर-उधर भटक रहे हैं।

हल्द्वानी के अलावा लोग बरेली और दिल्ली की तरफ भी इलाज के लिए जा रहे हैं जहां उन्हें लाखों का खर्च उठाना पड़ रहा है। ऐसे में लोग आर्थिक मार भी झेल रहे हैं।

इलाज पर खर्च हो गए लाखों
मृतका नीमा जोशी के पति नीरज जोशी ने बताया कि सुशीला तिवारी अस्पताल से रेफर होने के बाद बृजलाल और उसके बाद बरेली के राममूर्ति अस्पताल ले गए। 50 से 60 हजार रुपये तक की जांच करवाई और इलाज के नाम पर चार से पांच लाख रुपये खर्च कर दिए, उसके बावजूद नीमा को नहीं बचा पाए। उनकी दो बच्चियां हैं, चार वर्षीय खुशी और डेढ़ वर्षीय लक्ष्मी। अपनी मां की मौत से बेखबर दोनों बच्चियां घर में लगी भीड़ को सिर्फ निहारती रहती हैं।

आर्थिक मार से भी जूझ रहे ग्रामीण

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पीड़ितों ने बताया कि मजबूरी में निजी अस्पतालों में भर्ती होने वाले मरीजों से 40 हजार रुपये से 1.5 लाख रुपये तक वसूले जा रहे हैं। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि आयुष्मान भारत कार्ड होने के बावजूद निजी अस्पताल इलाज से मना कर रहे हैं। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि पीलिया जैसी कई बीमारियों का पैकेज सिर्फ सरकारी अस्पतालों के लिए है, या फिर पोर्टल पर सर्वर डाउन का बहाना बनाया जा रहा है।

वर्षों से ठप पड़ी है पेयजल योजना
स्थानीय निवासी मनोज बर्गली ने बताया कि क्षेत्र के लिए वर्ष 2018 में डाडर ज्योलीकोट पेयजल योजना स्वीकृत हुई थी। यहां एक लाख लीटर क्षमता का टैंक भी बनाया गया। इससे ज्योलीकोट क्षेत्र के लोगों को पानी सप्लाई हो सकती है लेकिन आज तक योजना ठप पड़ी है और पानी सप्लाई नहीं हुआ। अगर इस योजना का लाभ ग्रामीणों को मिल रहा होता, तो उन्हें दूषित पानी नहीं पीना पड़ता और हालात बेहतर रहते।

ग्रामीणों की मांग

- ज्योलीकोट के सभी पीलिया मरीजों का इलाज सरकारी खर्च पर हो।

- निजी अस्पतालों में आयुष्मान कार्ड अनिवार्य रूप से लागू कराया जाए।

- रेफर सिस्टम बंद कर बेस अस्पताल ज्योलीकोट में ही विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती हो।

- दोषी जल संस्थान के अधिकारियों पर कार्रवाई हो।

ग्रामीणों ने लगाए आरोप...

- क्षेत्र के अभी भी कई स्रोतों का निरीक्षण जल संस्थान की ओर से नहीं किया गया है। लोग वहां का पानी पी रहे हैं। एक ही गांव में दस से ज्यादा जलस्रोत हैं। हालांकि लोगों को अब पानी उबाल कर पीने के लिए कहा जा रहा है लेकिन फिर भी गांवों में लगातार पीलिया के मरीज मिल रहे हैं। - मनोज बर्गली, उप प्रधान

- नैनीताल मुख्यालय के अधिकारियों को बताया गया था कि दूषित पानी की समस्या है, लेकिन जब तक तीन लोगों की मौत नहीं हुई, तब तक प्रशासन नहीं जागा। जल संस्थान के अधिकारियों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई होनी चाहिए कि दोबारा इस तरह की घटना न हो। - हिमांशु पांडे, बीडीसी सदस्य , बेलुवाखान

- सीवर का पानी स्रोत में जाने की समस्या दो साल पहले भी हुई थी, लेकिन उस समय जिम्मेदारों ने तुरंत संज्ञान लेकर ठीक करवा दिया था। अब उसी जगह पर दोबारा समस्या आई लेकिन किसी ने इस समस्या को गंभीरता से नहीं लिया। इसी कारण यह समस्या इतनी बड़ी हो गई। मनोज कुमार, बीडीसी सदस्य, गेठिया दो

- पांच दिनों से स्रोत का पानी बंद कर दिया है। लोग पांच दिनों से बिना पानी के रह रहे हैं। पीने के पानी की समस्या अब बढ़ गई है। टैंकर की व्यवस्था की गई है लेकिन आवश्यकता अनुसार पानी नहीं पहुंच रहा है। - नवल कुमार, प्रधान

सुशीला तिवारी अस्पताल में सभी व्यवस्थाएं हैं, वहां से मरीजों को रेफर नहीं किया जा रहा है। मरीजों की हालत बिगड़ने पर लोग खुद ही निजी अस्पतालों में ले जा रहे हैं। आयुष्मान कार्ड स्वीकार करने के निर्देश दिए हैं। जिन अस्पतालों में आयुष्मान कार्ड नहीं लागू है, वहां कम खर्च पर भी इलाज करने के लिए कहा गया है। इसके लिए ज्योलीकोट क्षेत्र में लगातार लोगों की जांच की जा रही है और एक एंबुलेंस तैनात की है। - डॉ. रश्मि पंत, सीएमओ

 

ज्योलिकोट में स्वास्थ्य विभाग की निगरानी तेज, 120 लोगों की जांच
ज्योलीकोट क्षेत्र में जल जनित रोगों की स्थिति को देखते हुए विभाग ने निगरानी तेज कर दी हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रश्मि पंत ने सोमवार को ज्योलीकोट प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर उपचाराधीन मरीजों का हाल जाना। स्वास्थ्य शिविरों में छिड़ा में 20 लोगों की जांच कर 14 के ब्लड सैंपल लिए गए, जबकि सरियाताल में 25 और ज्योलीकोट में 95 लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। ज्योलीकोट में छह मरीजों को उपचार के लिए भर्ती किया गया। सीएमओ ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ज्योलीकोट को 24 घंटे खुला रखने और आपात सेवाओं के लिए 108 एंबुलेंस तैनात करने के निर्देश दिए। आशा कार्यकर्ताओं की ओर से घर-घर सर्वे भी जारी है। विभाग ने लोगों से दस्त, उल्टी, बुखार, कमजोरी या पीलिया के लक्षण होने पर तत्काल स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने की अपील की है। 

शुद्ध पेयजल और न्याय की मांग के लिए ज्योलीकोट में प्रदर्शन आज
दूषित जल से असमय जान गंवाने वाले विद्यालय के छात्र रितेश जीना और नीमा जोशी के शोक संतप्त परिवारों को तत्काल न्याय दिलाने, शुद्ध पेयजल की आपूर्ति के लिए नैनीताल यूथ कनेक्ट मंगलवार को ज्योलीकोट बाजार में तीन घंटे तक शांतिपूर्ण प्रदर्शन करेगा। संगठन के संस्थापक छात्र कार्तिकेय ने क्षेत्रवासियों से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की है। 

बीडी पांडे अस्पताल में बढ़ी पीलिया के मरीजों की संख्या
ज्योलीकोट क्षेत्र में जलजनित बीमारियों के बढ़ते प्रकोप के बीच अब पीलिया के मरीजों की संख्या भी लगातार बढ़ने लगी है। बीडी पांडे जिला अस्पताल में ज्योलीकोट के बाद अब हरिनगर क्षेत्र से भी पीलिया से पीड़ित मरीज उपचार के लिए पहुंचने लगे हैं। सोमवार को अस्पताल में क्षेत्र के पीलिया के सात मरीज भर्ती किए गए। इनमें बच्चे भी शामिल हैं।

अस्पताल की प्रभारी पीएमएस डॉ. द्रौपदी गर्ब्याल ने बताया कि 25 अगस्त से अब तक पीलिया के करीब 30 मरीज अस्पताल में भर्ती किए जा चुके हैं। वर्तमान में भी ज्योलीकोट क्षेत्र के पीलिया से पीड़ित 11 मरीज भर्ती हैं। उन्होंने बताया कि हरिनगर क्षेत्र से आ रहे मरीजों का उपचार किया जा रहा है। सीएमओ डॉ. रश्मि पंत ने बताया कि विभाग ने ज्योलीकोट के अलावा अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में भी निगरानी बढ़ा दी है। विभाग की ओर से ऐसे मरीजों की ट्रैकिंग की जाएगी, जिनमें पीलिया या अन्य जलजनित बीमारी के लक्षण दिखाई दे रहे हैं। किसी क्षेत्र से लगातार मरीज बढ़ने पर अन्य लोगों की भी जांच की जा रही है। 

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