हल्द्वानी। जलजीवन मिशन के अंतर्गत हल्द्वानी और कोटाबाग ब्लॉक के ग्रामीण क्षेत्रों में 35 करोड़ की लागत से पेयजल व्यवस्था सुधारी जाएगी। इसके लिए पेयजल लाइनों का पुनर्गठन के साथ ही छह गांवों में ट्यूबवेल और ओवरहेड टैंक बनाए जाएंगे।
भारत सरकार की जलजीवन मिशन योजना के तहत हल्द्वानी और कोटाबाग ब्लॉक के 133 गांवों में पेयजल व्यवस्था का काम जलसंस्थान हल्द्वानी डिविजन को मिला है। प्रथम चरण में हर घर नल-हर घर जल योजना के तहत वंचित परिवारों तक पानी के कनेक्शन पहुंचाने के बाद अब दूसरे चरण की योजना पर काम शुरू हो गया है।
जलसंस्थान के सहायक अभियंता एवं नोडल अधिकारी आरएस विश्वकर्मा ने बताया कि दूसरे चरण की योजना के लिए 49 गांवों का चयन किया गया है। इसके लिए 44 डीपीआर तैयार की गई, जिसमें से 21 डीपीआर को तकनीकी एवं वित्तीय दोनों स्वीकृति मिल गई है। इसके टेंडर की प्रक्रिया चल रही है। हल्द्वानी ब्लाक के मीठा आंवला गांव में ग्राउंड लेवल टंकी और पेयजल लाइनों का पुनर्गठन शुरू हो गया है।
यहां बनेंगे ट्यूबवेल और ओवरहेड टैंक
- बजूनिया हल्दू
- देवलचौड़ खाम
- करायल चतुर सिंह
- किशनपुर घुड़दौड़ा
- गुलजारपुर रामसिंह
- देवलचौड़ (कोटाबाग)
13120 घरों में पहुंचा पानी का कनेक्शन
हल्द्वानी। जलजीवन मिशन के तहत हल्द्वानी और कोटाबाग ब्लॉक में प्रथम चरण में 133 गांवों में पेयजल से वंचित 17044 परिवारों के घरों तक पानी का कनेक्शन पहुंचाने का काम जलसंस्थान हल्द्वानी डिविजन को करना था। इसमें से 13120 परिवारों के घरों तक पानी का कनेक्शन पहुंचाने का काम पूरा हो चुका है। प्रत्येक परिवार को केवल एक रुपया कनेक्शन का देना पड़ा, बाकी खर्चा योजना की धनराशि से किया गया। इस कार्य पर 2 करोड़ 44 लाख रुपये की धनराशि खर्च हुई है। कोटाबाग ब्लाक के बासी और परबासी गांव में कुछ समस्या आने के कारण 199 परिवारों के घरों तक पानी के कनेक्शन नहीं पहुंच सके। इस तरह हल्द्वानी और कोटाबाग ब्लॉक में अभी 3929 परिवारों को पानी के कनेक्शन दिए जाने बाकी हैं।
हर घर नल-हर घर जल योजना के तहत वंचित परिवारों को पानी का कनेक्शन देने का काम 80 फीसदी पूरा हो गया है। प्रथम चरण के बाकी परिवारों को दूसरे चरण में पेयजल कनेक्शन देने का काम किया जाएगा। दूसरे चरण में चयनित गांवों में नलकूप, ओवरहेड टैंक निर्माण के अलावा पेयजल लाइनों को दुरुस्त किया जाएगा। ताकि प्रत्येक परिवार को निर्धारित मानक के अनुसार पेयजल उपलब्ध हो सके।
- एसके श्रीवास्तव अधिशासी अभियंता, जलसंस्थान