भीमताल (नैनीताल)। पद्मश्री डॉ. यशोधर मठपाल ने कहा कि ‘हम सबै लोनगनैकि पछ्यांण हमरि कुमाऊंनी बोली बटी छू। आज हमरि कुमाऊंनी बोली भाषाक अस्तित्व खतर में छू। हमूंलि ये पर ध्यान नी द्योत यो विलुप्त है जालि।’
वह सोमवार को श्री सिद्धि विनायक बरात घर में आपुण बोली, आपुण पछ्यांण कुमाऊंनी गोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। इससे पूर्व उन्होंने दीप जलाकर गोष्ठी का शुभारंभ किया। शिशु मंदिर के स्कूली बच्चों ने सरस्वती गीत से अतिथियों का स्वागत किया।
गोष्ठी में पहरू पत्रिका के संपादक हयात सिंह रावत ने कहा कि कुमाऊंनी-गढ़वाली दोनों भाषाओं को आठवीं भाषा का दर्जा देना होगा। भाजपा नेता पुष्कर सिंह मेहरा ने कहा कि ‘हम सबूं कैं कुमाऊंनी भाषा बचूणांक लिजि ठुल-ठुल गोष्ठी करण पड़ाल। सरकारैलिकुमाऊंनी भाषा कैं आठवीं अनुसूची में दर्ज करूंणैकि लिजि प्रयास करण चैंछ।’
ब्लॉक प्रमुख डॉ. हरीश बिष्ट ने कहा कि सब लोग मिलकर आगे आएं तो कुमाऊंनी भाषा को बचाया जा सकता है। जिपं सदस्य अनिल चनौतिया, दयाल आर्य, चंदन बिष्ट, कृपाल मेहरा, धीरज जोशी, बच्ची सिंह बिष्ट, पूरन बृजवासी, लोकेश वर्मा, डीके शर्मा ने कहा कि आने वाली पीढ़ी को कुमाऊंनी भाषा का ज्ञान हो सकें इसके लिए सभी लोगों को कुमाऊंनी भाषा को बचाने के लिए आगे आना होगा। संचालन कर रहे समाजसेवी प्रेम कुल्याल ने कहा कि कुमाऊंनी भाषा को बचाने के लिए हर एक व्यक्ति को अपने घर से पहल शुरू करनी होगी। गोष्ठी में राजेंद्र पांडे ने गिर्दा के गीतों की सुंदर प्रस्तुति दी। इस दौरान विनोद कुमार जोशी, केडी भारद्वाज, राधा कुल्याल, अनीता प्रकाश, बीना देवड़ी, उमा पढालनी, पुष्पा मेलकानी आदि मौजूद रहे।
कोट
आने वाली पीढ़ी को अगर कुमाऊंनी भाषा की जानकारी देनी है तो सभी लोगों को आपस में कुमाऊंनी भाषा में बातचीत करनी होगी।
जया बोहरा, ग्राम प्रधान
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हमें कुमाऊंनी बोलने में शर्म नहीं बल्कि गर्व महसूस करना चाहिए। यह भाषा हमें हमारी संस्कृति का परिचय कराती है।
राधा कुल्याल, ग्राम प्रधान
कोट
कुमाऊंनी भाषा को बचाने के लिए अधिक से अधिक लोगों को इसका व्यापक प्रचार-प्रसार रना होगा। नई पीढ़ी में कुमाऊंनी बोली के प्रति लगाव पैदा करना होगा।
नमिता सुयाल, आयोजिका कुमाऊंनी गोष्ठी
कोट
परिवार के हर सदस्य के कुमाऊंनी बोलनी होगी जिससे समाज में कुमाऊंनी का विस्तार हो सके। इसके लिए हम सबको आगे आना होगा।
डॉ मंजू पांडे, साहित्यकार
कोट
वर्तमान समय में कुमाऊंनी भाषा को बचाए रखना जरूरी है। युवा पीढ़ी को कुमाऊंनी से जोड़ने के लिए मैंने पुस्तक भी लिखी है।
- हेमा हर्बोला, सेवानिवृत्त शिक्षिका