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बागेश्वर में सरयू नदी में खनन मामले में स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश

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प्रतीकात्मक फोटो।
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नैनीताल। बागेश्वर में सरयू नदी में खनन के मामले में हाईकोर्ट ने सरकार को स्थिति स्पष्ट करने के दिए निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 24 मार्च की तिथि नियत की है।
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मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। बागेश्वर निवासी प्रमोद कुमार मेहता ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर कहा था कि बागेश्वर के एसडीएम ने 9 मार्च को एक निविदा प्रकाशित कराई थी। इसमें स्थानीय व्यक्तियों/ संस्थाओं को सरयू नदी में रेता उपखनिज के निस्तारण के लिए खुली नीलामी में आमंत्रित किया गया था।
याचिकाकर्ता ने इसे चुनौती देते हुए कहा था कि खुली नीलामी के आड़ में जिला प्रशासन माफिया को लाभ पहुंचाने और बड़ी मशीनों जैसे जेसीबी पोकलैंड के इस्तेमाल की अनुमति देकर पवित्र नदी के स्वरूप को खत्म करने का प्रयास कर रहा है। याचिका में कहा गया कि सरयू नदी में बिना मशीनों के ही चुगान होता आया है। याचिका में कहा गया कि निविदा के लिए 19 मार्च तक आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि निर्धारित की गई थी। प्रशासन ने 20 मार्च को ही खुली नीलामी कर दी।
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याचिका में कहा गया कि नीलामी को निरस्त करने के लिए स्थानीय लोगों ने जिलाधिकारी बागेश्वर को 13 मार्च को संयुक्त प्रत्यावेदन भी दिया था लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। याचिकाकर्ता की ओर से 9 मार्च को जारी निविदा विज्ञापन व खुली नीलामी को चुनौती दी गई।
याचिकाकर्ता का कहना था कि कठायतबाड़ा, सेंज, द्वाली, चौरासी, भिटालगांव, मनीखेत क्षेत्र से सरयू नदी पर मैन्युअल चुगान से बजरी रेता का निष्पादन हो जिससे स्थानीय लोगों को न सिर्फ रोजगार मिलेगा बल्कि नदी भी अपने प्राकृतिक रूप में सुरक्षित रहेगी। याचिकाकर्ता का कहना था कि सरयू नदी में रेता बजरी की मात्र के बिना आकलन के ही नियम विरुद्ध नीलामी की जा रही है, जो उत्तराखंड रिवर ट्रेनिंग नीति 2020 के प्रावधानों के विपरीत है। पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सरकार को स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं।
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