मां से बीमारी का इलाज कराने और पत्नी से मकान बनवाने का वादा कर 14 अगस्त को घर से निकले मोहननाथ अब नहीं लौटेंगे। शहादत की खबर सुनकर पत्नी तो बेसुध हो गई और मां की आंखें पथरा गईं, पास-पड़ोस की महिलाओं ने उन्हें ढांढस बंधाया। शनिवार की सुबह शहीद का पार्थिव शरीर बिंदुखत्ता पहुंचेगा।
बिंदुखत्ता इंद्रानगर प्रथम निवासी पूर्व सैनिक स्व. शंकरनाथ गोस्वामी के पुत्र मोहननाथ गोस्वामी जम्मू कश्मीर में तैनात थे। दो सितंबर की रात दो बजे हंदवाड़ा क्षेत्र में पाक आतंकवादियों से मुठभेड़ में चार आतंकवादियों को मौत के घाट उतारने के दौरान गोलियां दागते हुए मोहन वीरगति को प्राप्त हो गए। आर्मी मुख्यालय से शहीद के भाई शंभूनाथ गोस्वामी को बृहस्पतिवार को दूरभाष पर शहादत की सूचना मिली।
शंभूनाथ मां राधिका देवी और शहीद की पत्नी भावना को सूचना देने की हिम्मत नहीं जुटा सके। खबर सुनकर पास-पड़ोस की महिलाएं घर पर पहुंचने लगीं। इसी बीच कालाढूंगी से शहीद के ससुराली भी पहुंच गए। काफी देर तक तो मां और पत्नी को मोहननाथ के पैर में गोली लगने की बात ही बताई, लेकिन देर रात उन्हें शहीद होने का आभास हो गया तो पत्नी भावना बेहोश हो गई।
उन्हें अस्पताल ले जाया गया। शुक्रवार की सुबह भी डाक्टरों ने घर पहुंचकर उनका स्वास्थ्य जांचा। मां राधिका देवी की आंखें पथरा गई हैं। उन्हें यकीन नहीं हो रहा कि उनका बेटा अब इस दुनिया में नहीं रहा। गांव की महिलाएं राधिका देवी को ढांढस बंधा रही हैं।