हार्निया का इलाज नेट से? चौंकिये नहीं। यह सच है, सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज (एसटीएच) के सर्जरी विभाग ने हार्निया में इस्तेमाल होने वाले मैस की जगह नेेट का इस्तेमाल किया है।
अब तक 25 रोगियों पर यह विधि सफलतापूर्वक आजमाई गई है। सर्जरी विभाग का दावा है कि इससे इलाज सस्ता हुआ है, इससे मरीज को किसी तरह की अभी तक दिक्कत नहीं हुई है।
हार्निया की शिकायत को लेकर मेडिकल कॉलेज में महीने भर में 10 से 12 नए केस पहुंचते हैं। डॉक्टरों के अनुसार इसमें से अधिकांश में आंत को अपनी जगह से हटकर बाहर की तरफ आ जाता है।
इससे रोगी में संबंधित जगह पर दर्द, सूजन, फूलने की शिकायत होती है। मेडिकल कॉलेज सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डा. केएस शाही कहते हैं कि अभी तक इसके इलाज में मैस का इस्तेमाल किया जाता था, मैस का संबंधित अंग को कवर कर एक तरह से बांध दिया जाता था।
यह मैस औसतन 1200 से 1500 तक आती थी। पर हमारे यहां गरीब रोगी भी आते हैं, ऐसे में मैस की जगह दूसरे विकल्पों पर विचार की योजना बनी। करीब छह महीने पहले हमने मैस की जगह एक तरह की मच्छर आदि को कीड़ों को रोकने वाले नेट के इस्तेमाल की योजना बनाई।
डा. शाही कहते हैं इस नेट और मैस दोनों का निर्माण प्रोलीन नामक पदार्थ से होता है। आकार भी एक ही जैसा होता है। करीब छह महीने में हमने 25 रोगियों में कुशलतापूर्वक इस विधि से ऑपरेशन किया है।
इसके परिणाम उत्साहवर्द्धक है। औसत एक मरीज पर कीमत 50 पैसे के आसपास आई होगी। हम समानांतर हार्निया में मैस का भी इस्तेमाल कर ऑपरेशन कर रहे हैं, जिससे नेट और मैस दोनों का तुलनात्मक अध्ययन हो सके।