खाद्य वस्तुओं की कीमतों में उछाल आने से गरीब लोगों को दो वक्त की रोटी जुटाना मुश्किल हो गया है। लगातार बढ़ती महंगाई से किचन का बजट बिगड़ने से महिलाएं परेशान हैं। जो अरहर की दाल 120 रुपये प्रति किलो थी वह अब 150 से 160 रुपये किलो पहुंच गई है। इसी तरह उड़द की काली दाल भी 160 रुपये तो उड़द की धुली दाल 180 रुपए किलो के भाव पर आसमान छू रही है। दालों पर महंगाई चढ़ी तो चीनी भी इससे अछूती नहीं रही और चीनी भी 32 रुपए से 38 रुपए किलो पर पहुंच गई है। इससे आम जनता बुरी तरह त्रस्त है मगर इस मुद्दे पर कोई राजनैतिक पार्टियां चुप हैं।
---
महंगाई का कहर
खाद्य वस्तुओं का नाम वर्ष 2014 में कीमत मई 2015 में कीमत मई 2016 में कीमत
दाल अरहर 70 रुपये प्रति किलो 120 रुपये किलो 150 रुपये किलो
दाल उड़द 75 से 85 रुपये किलो 100 रुपये 160 रुपये किलो उड़द धुली 90 से 100 रुपये किलो 120 रुपये 180 रुपये किलो मूंग की दाल 80 से 90 रुपये 100 रुपये 110 रुपये किलो
मूंग धुली दाल 100 से 110 110 रुपये 120 रुपये किलो
चना दाल 45 से 50 60 रुपये 80 रुपये किलो
दाल मलका 70 से 75 रुपये 90 रुपये 90 रुपये किलो
राजमा 85 रुपये 100 रुपये 90 रुपये किलो
चना काबली 50 से 65 रुपये 60 रुपये 110 रुपये
आटा 20 से 21 रुपये स्थिर 21 रुपये किलो
तेल सरसों 80 रुपये 90 रुपये 95 रुपये किलो
रिफाइंड आयल 70 से 90 रुपये 80 रुपये 80 से 85 रुपये लीटर
चीनी 35 से 36 रुपये 28 से 30 रुपये 38 रुपये किलो
----------------
मसाले वर्ष 2014 में मई 2015 में मई 2016 में
जीरा 140 से 150 रुपये किलो 200 रुपये किलो 220 रुपये किलो
साबुत धनिया 130 रुपये 150 रुपये 140 रुपये
हल्दी साबुत 70 रुपये 90 रुपये 120 रुपये
मिर्च साबुत 130 रुपये 160 रुपये 170 से 180 रुपये
काली मिर्च 600 रुपये 740 रुपये 850 रुपये
लौंग 700 रुपये 850 रुपये 900 रुपये
------
मेवा
वर्ष 2014 में मई 2015 में मई 2016 में
बादाम गिरि 750 रुपये किलो 850 रुपये किलो 600 रुपये किलो
काजू 550 रुपये किलो 600 रुपये किलो 680 रुपये किलो
किशमिश 200 रुपये 250 रुपये 200 रुपये किलो
--
आम वस्तुओं की कीमतें काफी बढ़ी हैं। खासकर दालों का भाव नीचे नहीं आ पा रहा है। दालें लगातार महंगी हो रही हैं। जो परिवार एक माह के राशन के साथ छह से आठ किलो दालें लेकर जाते थे। वो अब दो से तीन किलो ही लेकर जा रहे हैं। लोग केवल जरूरत भर के लिए दालें और अन्य खाद्य सामग्री लेकर जा रहे हैं। - गौतम अरोरा (रिंकल), सीताराम मुलखराज किराना दुकानदार, मंगलपड़ाव।
--
महंगाई पर महिलाओं से बातचीत
0 महंगाई की मार ने किचन का बजट ही बिगाड़ दिया है। चुनाव के वक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वायदा किया था कि महंगाई कम होगी मगर महंगाई तो कम होने का नाम ही नहीं ले रही। आखिर महंगाई से राहत कब मिलेगी। - गुरप्रीत कौर
0 दालें इतनी महंगी हो जाएंगी, कभी सपने में भी नहीं सोचा था। अरहर की दाल के साथ साथ उड़द की दाल भी आसमान छू रही है। महंगाई के इस दौर में मध्यम वर्गीय परिवार को खर्चा चलाना ही मुश्किल हो गया है।
- बीना भट्ट
0 दो सालों में खाद्य वस्तुओं पर महंगाई कम होने के बजाय और बढ़ी है। जो अरहर की दाल 100 रुपये से कम रहती थी वो 160 रुपये पहुंच गई है। मोदी सरकार महंगाई पर अंकुश लगाने में पूरी तरह असफल साबित रही है। - डा. मनीषा गुप्ता
0 आम वस्तुओं की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि से घर का खर्च बहुत बढ़ गया है। केंद्र सरकार ने महंगाई पर अंकुश लगाने को कोई कदम नहीं उठाए जिसके कारण आम जनता महंगाई से बुरी तरह त्रस्त है। घर का बजट ही बिगड़ जा रहा है। - ऋचा कर्नाटक
0 केंद्र में नरेंद्र मोदी ने सत्ता संभालते समय वायदा किया था कि महंगाई नहीं बढ़ेगी मगर हो इसके विपरीत ही रहा है। सरकार जनता से किया कोई वायदा पूरा नहीं कर सकी। महंगाई पर अंकुश लगाना चाहिए।
- राधा कुरिया
0 लगातार बढ़ रही महंगाई से किचन का बजट ही बिगड़ गया है। जो राशन पहले पांच हजार में आ जाता था वो दोगुनी कीमत में भी नहीं आ रहा है। महंगाई बढ़ने से सब परिवार परेशान हैं। इस पर रोक लगनी चाहिए।
- चंपा पांडेय
0 दालों पर खासकर अरहर की दाल बहुत महंगी हो गई है। मध्यम वर्गीय परिवारों ने भी अरहर की दाल खानी कम कर दी है। सरकार को महंगाई रोकने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। केवल बातों से काम नहीं चलेगा।
- तनुजा भट्ट