कुमाऊं के बड़े सरकारी अस्पतालों में शुमार हल्द्वानी के डा. सुशीला तिवारी अस्पताल, बेस अस्पताल और महिला अस्पताल में मरीजों की भीड़ बढ़ती जा रही है। इसके विपरीत यहां संसाधन लगातार घटते जा रहे हैं। यहां ने पर्याप्त विशेषज्ञ डॉक्टर हैं न उपकरण। पंजीकरण कक्षों पर सुबह से ही लंबी कतारें लग जाती हैं। उसके बाद डॉक्टरों को दिखाने के लिए जद्दोजहद होती है, फिर खून आदि की जांच कराने के लिए जूझना पड़ता है। महिला अस्पताल स्त्री रोग विशेषज्ञ, चिकित्सा अधिकारी, स्टाफ नर्स और जूनियर फार्मासिस्ट की कमी का सामना कर रहा है तो वहीं बेस अस्पताल में आईसीयू तो तैयार है, लेकिन इसके लिए न डॉक्टर हैं न प्रशिक्षित स्टाफ। एसटीएच में मशीनें लगातार खराब हो रहीं हैं। पिछले चार माह से रेडियोलॉजिस्ट न होने से अल्ट्रासाउंड के लिए गर्भवती महिलाओं को निजी सेंटरों में जाना पड़ रहा है।
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स्त्री रोग विशेषज्ञों की कमी से जूझ रहा महिला अस्पताल
हल्द्वानी। महिला अस्पताल स्त्री रोग विशेषज्ञ और महिला चिकित्सा अधिकारियों की कमी का सामना कर रहा है जबकि यहां हल्द्वानी के साथ ही आसपास के क्षेत्रों से गर्भवती और अन्य रोगों से ग्रस्त महिलाएं पहुंचती हैं। अस्पताल में डॉक्टरों के 29 पदों में से स्त्री रोग विशेषज्ञ के आठ पद हैं जिनमें पांच तैनात हैं। उनमें भी एक स्त्री रोग विशेषज्ञ मसूरी अटैच हैं तो दूसरी इस्तीफा दे चुकी हैं। वर्तमान में सिर्फ तीन स्त्री रोग विशेषज्ञ ही कार्यरत हैं।
पैथोलॉजिस्ट के दो पदों में से एक कार्यरत हैं जबकि प्रतिदिन 70 से 80 मरीजों की जांच की जाती है। डॉक्टर के साथ ही स्टाफ नर्स और जूनियर फार्मासिस्ट की भी कमी है। अल्ट्रासाउंड टाइप टू और डाप्लर की सुविधा भी नहीं है। महिला चिकित्सा अधिकारी के स्वीकृत आठ पदों में से चार स्थायी महिला चिकित्सा अधिकारी तैनात हैं जिनमें भी एक का चयन पोस्ट ग्रेजुएशन के लिए हो चुका है। वर्तमान में तीन महिला चिकित्सा अधिकारी ही कार्य कर रही हैं। सीएमएस डॉ. उषा जंगपांगी ने बताया कि महिला अस्पताल को स्त्री रोग विशेषज्ञ और महिला चिकित्सा अधिकारी की सख्त जरूरत है।
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बेस में तैयार आईसीयू छह माह से बंद है
बेस अस्पताल में इस साल जनवरी में आईसीयू बनकर तैयार हो गया था, लेकिन स्टाफ न होने के कारण छह माह से यह बंद पड़ा है। अस्पताल की सीएमएस डॉ. सविता ह्यांकि का कहना है कि स्टाफ की मांग के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा गया है।
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सुशीला तिवारी अस्पताल में 14 मार्च से रेडियोलाजिस्ट नहीं
कुमाऊं के सबसे बड़े डॉ. सुशीला तिवारी अस्पताल में रेडियोलाजिस्ट नहीं होने से 14 मार्च से अल्ट्रासाउंड बंद हैं। जनपद के अलावा कुमाऊं भर से और यूपी के सीमावर्ती क्षेत्रों से बड़ी संख्या में गर्भवती महिलाएं यहां इलाज के लिए पहुंचती हैं।
अस्पताल में शौचालयों की स्थिति काफी खराब है। ओपीडी में जो हैं वे बंद हैं जबकि कुछ निजी हाथों में दिए गए हैं जहां मरीजों से शुल्क लिया जाता है। अस्पताल में गायनी, सर्जरी समेत विभिन्न विभागों में डॉक्टरों के पद लंबे समय से खाली हैं। मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉ. अरुण जोशी ने बताया कि रेडियोलाजिस्ट के पद पर इंटरव्यू के बाद एक रेडियोलाजिस्ट का सलेक्शन हो गया है, उन्होंने अभी ज्वाइन नहीं किया है।