हल्द्वानी। जाने कौन सा बुरा वक्त मेरे जीवन में आया, जिसके बाद मैं 16 माह से यहां बंद हूं, लेकिन आज राम का किरदार निभाते हुए महसूस हो रहा कि असली किरदार तो यह है, जिसमें आज्ञाकारी पुत्र हैं, मर्यादा हैं और संस्कार भी हैं। मेरी बेटी लगभग दो साल की हो गई है। हर पिता की तरह सोचता रहता हूं काश, बेटी के पास होता उसे चलना फिरना सिखाता। 27 वर्षीय संदीप भावुकतावश बहुत कुछ कह पाते, इतने में राम का पात्र निभाने मंच की ओर चल पड़े।
दरअसल, हल्द्वानी उपकारागार में तीन दिवसीय रामलीला चल रही है। इसमें बंदी ही किरदार निभा रहे हैं। होटल मैनजेमेंट का कोर्स कर चुके संदीप राम का पात्र निभा रहे हैं। गाने और लिखने के शौकीन संदीप ने बताया जब भी जेल में टीवी पर बच्चों को देखता हूं, बेटी याद आ जाती है।
वहीं रावण बने 32 वर्षीय जीतेंद्र दो बच्चों के पिता हैं। नब्ज टटोलने पर भावुक हो गए, बोले, कोरोनाकाल में उनके बच्चों ने काफी मुश्किलों में दिन गुजारे हैं। वह टूर एंड ट्रेवल्स का बिजनेस करते थे। अब घर के हालात काफी खराब हैं। आज रावण बनकर सबको बता रहा हूूं कि बुराई का अंत निश्चित है।
राजा दशरथ और जनक की भूमिका निभा रहे 44 वर्षीय बंदी राधेश्याम साक्षर हैं। उन्होंने बताया वह पहली बार रामलीला खेल रहे हैं। मुझे जेल में दशरथ की भूमिका मिलना ईश्वर की कृपा है, क्योंकि जेल में रहकर मैं बंदियों को बुराई से बचने का संदेश देता रहता हूं। यीशु पर मुझे विश्वास है और वह मुझे नेक राह दिखा रहा है।
कारागार में तीन दिन की रामलीला, बंदी बने किरदार
हल्द्वानी। जेल में शुक्रवार को रामलीला का दूसरा दिन था। पिछले वर्ष महिला बंदियों की रामलीला हुई। इस बार पुरुष और महिला दोनों की अलग-अलग रामलीला हो रही है। हारमोनियम, ढोलक की थाप पर दो घंटे की पहले दिन की लीला में राम जन्म से लेकर सीता स्वयंवर तक रामलीला का मंचन किया गया। अलग अलग दिन की रामलीला में कुल 50 पात्र भाग ले रहे हैं, जिसकी दस दिन पहले रिहर्सल भी हुई। यह सब वरिष्ठ जेल अधीक्षक मनोज कुमार आर्या के निर्देश पर किया जा रहा है। शनिवार से महिला बंदी भी अलग से रामलीला करेंगे।
बंदी आनंद हैं रामलीला के डायरेक्टर
हल्द्वानी। रामलीला के पात्रों का चयन, भजन, कीर्तन, वेशभूषा और डायलॉग सभी कुछ बंदी आनंद के निर्देशन में चल रहा है। साढ़े तीन साल से बंद 30 वर्षीय आनंद 12वीं पास हैं। उन्हें रामलीला के दोहे कंठस्थ हैं। उन्होंने कहा बुराई का आखिर में अंत ही होता है और यह सत्य सबको समझना चाहिए इससे सभी के दिमाग मे कुछ अच्छी सोच पैदा होगी।
रामलीला सांस्कृतिक पर्व होने के साथ सामाजिक संदेश भी देता है, इसलिए बंदियों के बीच बंदियों के द्वारा रामलीला का आयोजन करवाया गया। ताकि इनपर कुछ सकारात्मक असर हो और बाहर निकलकर से लोग अच्छी जिंदगी बिता सकें। जेल में वर्तमान में 1325 बंदी हैं। -मनोज कुमार आर्या, वरिष्ठ जेल अधीक्षक।
हल्द्वानी जेल में रामलीला में बंदियों द्वारा आयोजित रामलीला में धनुष टूटने पर क्रोधित होते परशु- फोटो : HALDWANI