वन प्रभाग चंपावत में मनरेगा के तहत एक करोड़ 17 लाख रुपये की लागत से चेकडैम बनाने में गड़बड़ी के मामले में हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को दो सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ एवं न्यायमूर्ति वीके बिष्ट की संयुक्त खंडपीठ के समक्ष शुक्रवार को मामले की सुनवाई हुई। अधिवक्ता संजय भट्ट ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा कि 2011-12 में वनप्रभाग चंपावत के भिंगराड़ा रेंज की 37 वन पंचायतों में मनरेगा के तहत चेकडैम बनाने का कार्य दिया गया था।
इसके तहत एक करोड़ 17 लाख रुपये का काम होना था। इसके लिए 37 लाख का सीमेंट खरीदा गया और शेष धनराशि का भुगतान मजदूरों को करना था। याचिकाकर्ता के अनुसार सीमेंट की खरीद बेनामी फर्मों से दिखाई गई और जो गांव में रहते ही नहीं हैं, उन्हें मजदूर के रूप में दर्शाया गया।
इसकी शिकायत डीएम चंपावत से की गई थी, लेकिन तीन साल बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। इस संबंध में पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सरकार को दो सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।