पिथौरागढ़। सोर के कुमौड़ गांव का प्रसिद्ध हिलजात्रा उत्सव शुक्रवार को मनाया गया। हिलजात्रा के मुख्य पात्र लखिया और उसे रस्सियों में जकड़े दो गण विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। हिलजात्रा के मुख्य पात्र लखिया को देखने और उसका आशीर्वाद लेने के लिए हजारों लोगों की भीड़ जुटी।
कोरोना के कारण पिछले वर्ष हिलजात्रा पर्व नहीं मनाया गया। कुमौड़ गांव के लोगों ने केवल मुखौटों की पूजा कर परंपरा निभाई थी। इस वर्ष भी पहले केवल सांकेतिक रूप में हिलजात्रा मनाने का निर्णय लिया गया था लेकिन शुक्रवार को ग्रामीणों ने कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए उत्सव मनाने का निर्णय लिया। इसके बाद तैयारियां शुरू की गईं।
शाम चार बजते ही कुमौड़ के हिलजात्रा मैदान के आसपास लोगों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई। सबसे पहले हिलजात्रा मैदान में रोपाई करने वाली महिलाओं का दल आया। इसके बाद गल्या बल्द (आलसी बैल) की जोड़ी और एकलवा बैल मैदान में आया। गीत गातीं पुतारियां और तमाम तरह के क्रियाकलाप करतीं बच्चों की टोलियां भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं।
इसके बाद ढोल-नगाड़ों के बीच ऐतिहासिक मैदान में मुखौटा पहने लखिया ने प्रवेश किया। लखिया और उसे रस्सियों में जकड़े दो गणों के मैदान में उतरते ही लोग रोमांचित हो उठे। महिलाओं ने लखिया की पूजा-अर्चना की।
लखिया ने हजारों की भीड़ को आशीर्वाद दिया और कुछ समय बाद वह शांत हो गया। हिलजात्रा उत्सव में सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस जवान भी तैनात किए गए थे। एक साल के अंतराल के बाद आयोजित हिलजात्रा को लेकर लोगों में काफी उत्सुकता देखी गई।
हिलजात्रा में इन पात्रों ने निभाई भूमिका-
लखिया-नीरज महर, गण - पवन महर और वलदेव महर, पंडित- बल्लू महर, गल्या बल्द- निखिल महर और सूरज महर।
पहाड़ की कृषि और पशुपालन पर आधारित है हिलजात्रा उत्सव
पिथौरागढ़। पिथौरागढ़ की सोरघाटी सहित लगभग पूरे जिले में मनाए जाने वाले अधिकतर उत्सव कृषि और पशुपालन से जुड़े हैं। इनमें लखिया पात्र के कारण कुमौड़ का हिलजात्रा उत्सव विशेष आकर्षण का केंद्र रहता है। सातूं-आठूं पर्व के साथ यह उत्सव सदियों से मनाया जा रहा है। सभी पात्र मुखौटा पहने होते हैं। इसलिए यह एक प्रकार का मुखौटा नृत्य कहा जाता है।
हिलजात्रा में मुख्य रूप से खेती और पशुपालन को प्रदर्शित किया जाता है। हिलजात्रा में आने वाले सभी पात्र पुरातन संस्कृति, कृषि व्यवस्था, रहन सहन और तत्कालीन वेशभूषा को दर्शाते हैं। इस उत्सव का प्रमुख पात्र लखिया होता है।
गल्या बैलों की जोड़ी, हलिया, किसान, पुतारियां बने पात्र जिस खूबसूरत ढंग से प्राचीन परंपरा और संस्कृति को प्रस्तुत करते हैं, उससे पुरातन संस्कृति जीवंत रूप में देखने को मिलती है।
कृषि पर आधारित इस उत्सव को देखने के लिए हर साल हजारों की संख्या में लोग जुटते हैं। पहले लखिया को देखने के लिए 25 हजार लोगों की भीड़ जुटती थी लेकिन इस बार लगभग 10 हजार लोग हिलजात्रा देखने कुमौड़ पहुंचे।
पिथौरागढ़ के कुमौड़ में शुक्रवार को सोरघाटी के प्रमुख पर्व हिलजात्रा का आयोजन किया गया। हिलजात?- फोटो : PITHORAGARH
पिथौरागढ़ के कुमौड़ में आयोजित हिलजात्रा में एकलवा बल्द। संवाद- फोटो : PITHORAGARH