नैनीताल। हाईकोर्ट ने प्रदेश में खनन नीति, अवैध खनन, पीसीबी की अनुमति के बिना स्टोन क्रशर संचालित करने और आबादी क्षेत्रो में संचालित स्टोन क्रशरों के खिलाफ 38 से अधिक जनहित याचिकाओं पर अगली सुनवाई के लिए हाईकोर्ट ने चार अक्तूबर की तिथि नियत की है।
मुख्य न्यायाधीश आरएस चौहान एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार बाजपुर निवासी रमेश लाल, मिलख राज, रामनगर निवासी शैलजा साह, त्रिलोक चंद्र, जयप्रकाश नौटियाल, आनंद सिंह नेगी, वर्धमान स्टोन क्रेशर, शिव शक्ति स्टोन क्रेशर, बलविंदर सिंह, सुनील मेहरा, गुरमुख स्टोन क्रशर सहित अन्य 29 से अधिक लोगों ने हाईकोर्ट में जनहित याचिकाएं दायर कीं हैं। ये याचिकाएं विभिन्न बिंदुओं को लेकर दायर की गईं हैं। कुछ याचिकाओं में प्रदेश की खनन नीति को चुनौती दी गई है। कुछ में आबादी क्षेत्रों में चल रहे स्टोन क्रशरों को हटाए जाने के खिलाफ जनहित याचिकाएं दायर की गईं। कुछ जनहित याचिकाओं में स्टोन क्रशरों द्वारा अवैध रूप से किए जा रहे खनन तथा कुछ जनहित याचिकाओं में स्टोन क्रशरों द्वारा पीसीबी के मानकों को पूरा नहीं करने के खिलाफ दायर की गईं हैं।
शैलजा साह ने जनहित याचिका दायर कर कहा है कि अल्मोड़ा के मासी में रामगंगा नदी के किनारे से 60 मीटर दूरी पर रामगंगा स्टोन क्रशर लगाया गया है जो पीसीबी के नियमों के विरुद्ध है। बाजपुर के रमेश लाल ने जनहित याचिका दायर कर कहा है कि कोसी नदी में स्टोन क्रशर मालिकों द्वारा अवैध खनन किया जा रहा है। आनंद सिंह नेगी की जनहित याचिका में कहा गया है कि अभी तक सरकार ने नॉइज पॉल्यूशन जोन घोषित नहीं किया है। सरकार जहां मर्जी हो वहां स्टोन क्रशर लगाने की अनुमति दे रही है। इसलिए प्रदेश में नोइज पॉल्यूशन जोन घोषित किया जाए ताकि पता चल सके कि कौन सा जोन इंडस्ट्रियल है कौन सा आबादी और कौन सा ईको सेंसिटिव जोन।