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आपदा प्रभावितों के आंखों में दिखीं बेबसी और नमी

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गरमपानी (नैनीताल)। आपदा के बाद बेतालघाट ब्लॉक के ग्रामीणों का जनजीवन अस्तव्यस्त हो गया है। बेतालघाट के जोग्याड़ी क्षेत्र के लोगों को बिजली-पानी संकट समेत तमाम दुश्वारियों ने घेरा हुआ है। पहाड़ों के नजदीक रहते हुए लोग पहाड़ जैसी चुनौतियाें से लड़ने को मजबूर हैं। मंगलवार को जब संवाद न्यूज एजेंसी के संवाददाता मौके पर पहुंचे तो पता चला कि ग्रामीण किन कठिन हालातों में जीवन जीने को मजबूर हैं।
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बेतालघाट क्षेत्र के जोग्याड़ी, बारगल, गरजोली, गजार में आई दैवी आपदा में लघु विद्युत परियोजना बहने की वजह से लोग अंधेरे में रात काटने के लिए मजबूर हैं। मोबाइल चार्ज करने के लिए ग्रामीणों को दो किलोमीटर दूर फल्यानी गांव में जाना पड़ रहा है। वहीं सिल्टोना, दड़माड़ी, जोग्याड़ी और व्यासी में पेयजल लाइन ध्वस्त होने से लोग प्राकृतिक जल स्रोत के भरोसे हैं। जोग्याड़ी, जजुला, सिमराड़ मोटर मार्ग को जाने वाली सड़क मलबे से बंद पड़ी है। घरों के पास हुए भूस्खलन से लोग डर हुए हैं। सीम तल्लाकोट मोटर मार्ग की शुरुआत में चीड़ का पेड़ गिरा है। आधे किलोमीटर के बीच छह जगह पर सड़क बंद होने से लोग परेशान हैं। घटगाड़ में बना पानी का जलाशय पत्थरों से पटा है। आपदा के बाद से ग्रामीणों का जीवन दुश्वारियों से भर गया है।
गांव में बिजली नहीं होने के कारण फोन पर बात करना भी मुश्किल हो गया है। धूरा से आने वाली पेयजल योजना के पाइप जगह-जगह उखड़ने से पिछले एक हफ्ते से पेयजल संकट झेलना पड़ रहा है। आपदा पीड़ित एक परिवार को पंचायत भवन में ठहराया गया है। सरकार ग्रामीणों को हुए नुकसान का उचित मुआवजा दे। शीला देवी, ग्राम प्रधान जोग्याड़ी
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खेतीबाड़ी चौपट होने के साथ घर के आगे-पीछे मलबा आने से मकान को भी खतरा हो गया है। जीवन में ऐसी बारिश कभी नहीं देखी। तबाही का वह मंजर याद कर रूह कांप जाती है। अब बारिश आई तो सब बह जाएगा। आपदा से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया है।
पद्मा देवी, निवासी जोग्याड़ी
रोजगार के लिए घर पर आटा चक्की और दुकान खोली थी। अतिवृष्टि से दुकान में रखा सारा सामान बह गया। परिवार के सदस्यों की मेहनत से जोड़े गए भवन में एक करोड़ का नुकसान हुआ है। इसकी भरपाई सरकारी मुआवजे से नहीं हो सकती है। अब सीम के पुराने मकान में रहने को मजबूर हैं।
दीवान सिंह टनवाल, निवासी सीम
इस साल आपदा की दोहरी मार पड़ी है। कोरोना महामारी के दौरान बेटा दुनिया को छोड़कर चला गया। अब मकान प्राकृतिक आपदा की भेंट चढ़ गया। अब अंदर से हिम्मत टूट गई है। पड़ोसी के भवन में रहने को मजबूर हैं। आपदा के जख्म कैसे भर पाएंगे, समझ नहीं आ रहा है।
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बालम सिंह जलाल, निवासी सीम
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