जिले में डेंगू, दिमागी बुखार और मलेरिया का प्रकोप है मगर स्वास्थ्य महकमा काम करने की जगह नसीहत एवं उपदेश देने पर विश्वास कर रहा है।
शनिवार को एसीएमओ और टीम ने सुशीला तिवारी अस्पताल में डेंगू के भर्ती मरीजों का हालचाल पूछा साथ ही एन-1 पॉजिटिव होने पर डेंगू न मानने की नसीहत एसटीएच के एमएस को दी।
एमएस को मीडिया से बात न करने की हिदायत दी और बोले कि सीएमओ ही अधिकृत जानकारी मीडिया को देंगे। एसीएमओ डा. एमएम तिवारी, डा. एनसी तिवारी और जिला संक्रामक रोग अधिकारी डा. नंदन कांडपाल शनिवार सुबह सुशीला तिवारी अस्पताल के वार्ड सी में पहुंचे।
उन्होंने मच्छरदानी देखने के साथ ही डेंगू पीड़ितों का हालचाल पूछा। इसके बाद बच्चा वार्ड में बच्चों को देखा। कहा कि सर्वे टीमें भेजी जा रही हैं और लोगों को जागरूक किया जा रहा है।
टीम और सुशीला तिवारी अस्पताल के एमएस डा. एके पांडेय के बीच डेंगू की जांच को लेकर बहस हुई। टीम का कहना था कि एन-1 पॉजिटिव आने पर डेंगू न मानें एलाइजा टेस्ट में पुष्टि होने पर ही डेंगू मानें।
एमएस ने उनकी बात से इंकार कर दिया। एसीएमओ डा. एमएम तिवारी ने कहा कि मीडिया से दूरी बनाकर रखें और उन्हें कोई जानकारी न दें।
सीएमओ डा. एलएम उप्रेती के निर्देश हैं कि मीडिया को अधिकृत रूप से उनके स्तर से जानकारी दी जाएगी। सीएमओ ने बैठक में ये निर्देश दिए हैं।
डा. पांडेय ने कहा कि चिकित्सा-शिक्षा विभाग स्वास्थ्य महकमे के अधीन नहीं है और मैं सीएमओ के अंडर में नहीं आता हूं, अगर मीडिया जानकारी मांगेगा तो उसे दी जाएगी।