जिलाधिकारी दीपक रावत ने शनिवार को बेस और सुशीला तिवारी अस्पताल का निरीक्षण किया। उन्होंने संदिग्ध या लक्षण दिखने पर डेंगू मरीज को भर्ती कर इलाज करने के निर्देश दिए।
किसी भी मरीज को रेफर न करने की सख्त हिदायत दी। डीएम की नाराजगी के बाद मलेरिया पीड़ित एक मरीज को इमरजेंसी में भर्ती किया गया।
डीएम रावत शनिवार की शाम लगभग पांच बजे बेस अस्पताल पहुंचे। उन्होेंने बी ब्लाक में बने डेंगू वार्ड का निरीक्षण किया। बी ब्लाक में भर्ती कठघरिया निवासी (22 वर्षीय) मुकेश की कुशलक्षेम पूछी।
मुकेश ने बताया कि वह दिल्ली में काम करता है और साकेत में रहता है। बुखार की शिकायत पर घर आया था। जांच के दौरान डेंगू की पुष्टि हुई।
डीएम ने शौचालय को साफ-साथुरा रखने के निर्देश बेस अस्पताल के सीएमएस डा. एससी पंत को दिए। इसके बाद रावत सुशीला तिवारी अस्पताल पहुंचे।
इमरजेंसी में मौजूद आकाश ने बताया कि उसके भाई राकेश (20 वर्षीय) को डेंगू है और शुक्रवार की रात टैक्सी से लेकर एसटीएच आए थे। डाक्टरों ने दवा देकर भेज दिया और भर्ती करने से मना कर दिया।
जिलाधिकारी ने मरीज को न भर्ती करने पर एमएस डा. एके पांडेय से नाराजगी जताई। राकेश तबियत अधिक खराब होेने के कारण पत्नी की गोद में सिर रखकर इमरजेंसी के बाहर बैठा था।
डीएम ने कुशलक्षेम पूछने के बाद तत्काल भर्ती करने के निर्देश दिए। निजी लैब की जांच रिपोर्ट देखने पर पता चला कि राकेश को मलेरिया था। डीएम ने कहा कि राकेश की डेंगू से संबंधित जांच भी करा ली जाए।
उन्होंने कहा कि किसी भी मरीज को वापस नहीं किया जाएगा। डीएम डेंगू रोगियों के लिए बनाए गए वार्ड सी में पहुंचे और मरीजों का हालचाल जाना। इसके बाद बच्चों के लिए बने डेंगू वार्ड में भी बच्चों से कुशलक्षेम पूछी।
एसटीएच के एमएस डा. एके पांडेय ने कहा कि 50 हजार तक प्लेटलेट्स होने पर कोई गंभीर बात नहीं है। डीएम ने नई बस्ती गोपाल मंदिर, लाइन नंबर एक और इंदिरा नगर क्षेत्र के डेंगू मरीज भर्ती होने पर क्षेत्र का निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान साफ-सफाई मिलने पर संतोष जताया। उन्होंने सिटी मजिस्ट्रेट को निर्देश दिए कि फागिंग कराने के साथ ही सफाई का विशेष ध्यान रखा जाए। निरीक्षण के दौरान सिटी मजिस्ट्रेट हरबीर सिंह और एसडीएम पंकज उपाध्याय आदि थे।