क्वींस सीनियर सेकेंडरी स्कूल में सोमवार को प्रबंधन द्वारा प्रधानाचार्य और 12 शिक्षकों को हटाने पर भड़के छात्रों ने स्कूल में हंगामा और तोड़फोड़ की। उन्होंने बसों के शीशे और गमले भी तोड़ डाले। बाथरूम सहित जहां पर भी जो सामान मिला उसको नुकसान पहुंचाया। इस दौरान एक छात्र जख्मी हो गया। सीपीयू ने निजी अस्पताल ले जाकर उसका उपचार कराया।
शीतकालीन छुट्टियों के बाद सोमवार को क्वींस स्कूल खुलने पर सुबह करीब आठ बजे एसेंबली के लिए बच्चे और शिक्षक परिसर में एकत्र हुए थे। एसेंबली के दौरान प्रधानाचार्य नागेंद्र सिंह गंगोला मंच पर पहुंच गए और प्रबंधन द्वारा बिना कारण स्वयं को स्कूल से निकाले जाने की बात कह कर बच्चों को अचरज में डाल दिया।
उन्होंने बच्चों को बताया कि प्रबंधक ने उनके अलावा टीचर सीमा सुखीजा, प्रमोद पांडेय, मृदुला मनराल, दीपक जोशी, निखिल आर्य, स्नेहांशु बोरा, हर्षवर्धन, मीनाक्षी भट्ट, ललिता मेहरा, कोमल पांडेय, हिमानी जीना और कृतिका जोशी को भी नौकरी से निकाल दिया है।
प्रधानाचार्य ने बच्चों को बताया कि उनके और अन्य शिक्षकों के साथ अन्याय हुआ है। इसकी जानकारी मिलते ही प्रबंधक आरपी सिंह, निदेशक लिलि सिंह भी एसेंबली में आ गए। दोनों पक्षों में तनातनी होने लगी। प्रधानाचार्य नागेंद्र गंगोला और शिक्षक मंच से उतरकर छात्रों के बीच आ में गए।
प्रधानाचार्य और शिक्षकों को हटाने से नाराज छात्रों ने प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी और स्कूल के बाहर नैनीताल रोड पर जाम लगा दिया। स्कूल में हंगामे की जानकारी पर कुछ अभिभावक भी आ गए। किसी तरह सीपीयू और पुलिस ने बच्चों से जाम खुलवा दिया। इसके बाद छात्रों ने स्कूल में तोड़फोड़ शुरू कर दी।
उन्होंने स्टील की कुर्सियां उठाकर फेंक दीं, गमले तोड़ डाले तथा स्कूल परिसर में खड़ी बसों के शीशे भी तोड़ दिए। बच्चों का गुस्सा इतने में भी शांत नहीं हुआ, उन्होंने बाथरूम में जमकर भी तोड़फोड़ की। नोटिस बोर्ड तथा कमरों एवं खिड़कियों के शीशों को भी नुकसान पहुंचाया।
स्कूल में तोड़फोड़ की सूचना मिलने पर सिटी मजिस्ट्रेट हरबीर सिंह तत्काल पुलिस फोर्स भेजने के साथ ही खुद भी मौके पर आ गए। पुलिस ने डंडे फटकार कर छात्रों को काबू में किया। तोड़फोड़ के दौरान जख्मी छात्र रचित बोरा को सीपीयू कर्मी निजी अस्पताल में ले गए, उसके माथे पर चोट से खून बह रहा था।
अस्पताल के डाक्टरों के मुताबिक छात्र को दो टांके लगाए गए तथा सीपीयू कर्मी उसे घर छोड़ आए। हालांकि अभिभावक और बच्चों ने काफी देर तक स्कूल गेट पर हंगामा किया। सिटी मजिस्ट्रेट हरबीर सिंह ने विवाद का हल निकालने के लिए दोनों पक्षों को अपने कार्यालय में 11 बजे वार्ता के लिए बुला लिया।
सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय में वार्ता के दौरान बड़ी संख्या में बच्चे भी शिक्षकों और प्रधानाचार्य के साथ पहुंच गए। वार्ता के दौरान भी प्रबंधक और प्रधानाचार्य के बीच कई बार नोकझोंक हुई। सिटी मजिस्ट्रेट के समक्ष दोनों पक्षों में समझौता हुआ कि प्रबंधक हटाए गए प्रधानाचार्य नागेंद्र गंगोला को डेढ़ माह का वेतन देंगे।
प्रबंधक आरपी सिंह ने कहा कि उन्होंने किसी शिक्षक को नहीं हटाया है। वे मंगलवार को स्कूल आकर शिक्षण कार्य कर सकते हैं जबकि कुछ शिक्षक बिना नोटिस के हटाने की बात कह कर अग्रिम वेतन देने की मांग कर रहे थे। सिटी मजिस्ट्रेट ने उनकी मांग को यह कह कर खारिज कर दिया कि जब नौकरी से हटाया ही नहीं गया है तो अग्रिम वेतन की बात गलत है।