पिथौरागढ़/गंगोलीहाट। आमलकी एकादशी पर रंग पड़ते ही सीमांत के गांवों में खड़ी होली का गायन शुरू हो गया है।
बुधवार को महिलाओं ने आंवला वृक्ष की पूजा कर उस पर अबीर, गुलाल और रंग चढ़ाया। कई गांवों में चीर बंधन भी किया गया। इसके साथ ही अब खड़ी होली का खुमार होल्यारों पर छाने लगा है। गांवों में जहां दिन में खड़ी होली गायन होता है वहीं रात को बैठकी की धूम मचती है।
जिला मुख्यालय के पुराना बाजार, मझेड़ा, नाकोट, पांडेगांव आदि जगहों पर होली गायन हो रहा है। उधर, गंगोलीहाट में एकादशी के दिन हाट, पठक्यूड़ा, लाली, खतेड़ा, कुंजनपुर की होली महाकाली मंदिर पहुंची। यहां होल्यारों ने है तो हूं तो सूरत धरी मठ भीतर दर्शन दे महामाई, अंबा धन तेरो होली गाई। हनेरा, चोढियार, नोडूंगा, नड़िकद्यो, भाटगांव, चुडियागैर, मणकनाली की होली चामुंडा मंदिर पहुंची। नगरकोटी महामाई जय देवी आदि भवानी होली गीत गाकर देवी की आराधना की। कोठेरा की होली अंबिका मंदिर पहुंची। होल्यारों ने मथुरा मंडल बीच कान्हा ने ख्याल रचो होली का गायन किया। चीर, देवी का निशान, ढोल की थाप पर होल्यारों ने जमकर होली खेली।
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शिव के मन माहि बसे काशी
डीडीहाट/अस्कोट। बैकुंठ धाम गीता योग सेंटर में एकादशी में आंवला पूजन के बाद बैठकी होली हुई। महिला होल्यारों ने गणपति के संग खेले होली गाकर होली की शुरुआत की। उन्होंने शिव के मन माहि बसे काशी, कान्हा संग खेले होली गोपियां आदि होली गाईं। योग सेंटर के ट्रस्टी डीएस पांगती ने सभी को होली की बधाई देते हुए मिष्ठान वितरण किया। उधर, अस्कोट के देवल दरबार में चीर बांधने के साथ ही होली शुरू हो गई है। खोलिया गांव, हिनकोट, रसगाड़ी, बेड़ा, ऊंचाकोट, बगड़ीहाट, तीतरी, नरेत, सिंगाली, चरमा आदि क्षेत्रों में भी होली की शुरुआत हो चुकी है। संवाद