बिंदुखत्ता नगर पंचायत घोषित होने के बाद अब लालकुआं को परगना बनाने की तैयारियां तेज हो गई हैं। इसका प्रस्ताव शासन में लंबित हैं। शासन ने परगना संबंधी भू-अभिलेखों की जानकारी मांगी है। परगना अलग होने से लालकुआं क्षेत्र के लोगों को हल्द्वानी की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। इससे उनके समय और वक्त दोनों की बचत होगी। वहीं, कालाढूंगी में भी परगना बनाने की मांग जोर पकड़ने लगी है।
हल्द्वानी की स्थापना तत्कालीन कुमाऊं कमिश्नर ट्रेल ने 1834 में की थी। 2 फरवरी 1887 को हल्द्वानी में म्यूनिसिपल कमेटी गठित हुई। 1885 में टाउन एक्ट जारी हुआ। 1904 में नगर पालिका नोडिफाइड एरिया घोषित हुआ। 1904 में हल्द्वानी की जनसंख्या मात्र 6624 थी। ब्रिटिश काल में ही हल्द्वानी में सब डिवीजनल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) कार्यालय खुला। एसडीएम का कार्यक्षेत्र हल्द्वानी, काठगोदाम, लालकुआं, चोरगलिया और कालाढूंगी तक था। हल्द्वानी आज महानगर के रूप में विकसित हो चुका है। 1904 में जितनी आबादी हल्द्वानी पूरे शहर की थी, उतनी आज एक ही वार्ड और गांव की है। जनसंख्या के हिसाब से कालाढूंगी और लालकुआं तहसीलें बन गई। इन्हें परगना बनाने को लेकर नेताओं ने कभी जोर नहीं लगाया।
लालकुआं, कालाढूंगी तहसीलें अब तक हल्द्वानी परगना अंतर्गत हैं। लाखों की आबादी का क्षेत्रफल मात्र एक एसडीएम के भरोसे है। ऊपर से वीआईपी ड्यूटी लगने से परगना का पूरा कामकाज ठप हो जाता है। एसडीएम कोर्ट पहुंचने वाली फरियादी निराश होकर लौटते हैं। लालकुआं को परगना बनाने का प्रस्ताव सालों से शासन में लटका है। बिंदुखत्ता नगर पंचायत घोषित होने के बाद लालकुआं के परगना बनाने की फाइल दौड़ने लगी है। शासन ने इसे लेकर भू-अभिलेख तलब किए हैं। जल्द ही लालकुआं परगना अस्तित्व में आ सकता है।
परगना का क्षेत्रफल काफी बड़ा है। सप्ताह में कालाढूंगी में शुक्रवार और लालकुआं में मंगलवार को कैंप लगता है। बाकी कामकाज हल्द्वानी से संचालित होता है। लालकुआं परगना का प्रस्ताव दोबारा बनाकर भेजा है। परगना बनने से लोगों को काफी राहत मिलेगी। -पंकज उपाध्याय, एसडीएम