भीमताल में मस्त्यपालन कार्यशाला
- फोटो : अमर उजाला
भीमताल (नैनीताल)। शीतजल मात्स्यिकी अनुसंधान निदेशालय, भारतीय जीववैज्ञानिक सर्वे, शीतजल मात्स्यिकी संस्था की ओर से शुक्रवार से यहां तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी शुरू हो गई है। संगोष्ठी का विषय ‘उत्तराखंड में स्ट्रैटिजीज, इन्नोवेशंस एंड सस्टेनेबल मैनेजमेंट फॉर इनहैंसिंग कोल्डवाटर फिशरीज एंड एक्वाकल्चर’ है। मुख्य अतिथि डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय लखनऊ के उप कुलपति प्रो. आरसी सोबती ने संगोष्ठी का शुभारंभ किया।
छात्राओं ने सरस्वती वंदना, स्वागत गीत प्रस्तुत किया। प्रो. सोबती ने जलीय संसाधनों के समुचित उपयोग के बारे में जानकारी देते हुए वैज्ञानिक विकास को सामान्य जन तक पहुंचाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों द्वारा किए जाने वाले शोध और खोज का लाभ निचले स्तर पर मत्स्य पालकों तक पहुंचना चाहिए तभी शोध, खोज का महत्व है।
अन्य वक्ताओं ने भी शीतजल मत्स्य पालन एवं मात्स्यिकी की संभावनाओं, चुनौतियों एवं स्तरों की महत्ता बताई। मुख्य अतिथि प्रो. सोबती एवं अन्य अतिथियों ने संगोष्ठी के सोवनियर (यादगार-पुस्तिका) एवं सारांश पुस्तिका के साथ-साथ सीएफएसआई न्यूज लैटर, डॉ. एके सिंह एवं डॉ. डी शर्मा द्वारा लिखित पुस्तकों का भी विमोचन किया। संस्थान के निदेशक डॉ एके सिंह ने अतिथियों का स्वागत करते हुए संगोष्ठी के उद्देश्यों की जानकारी दी। उद्घाटन सत्र में कोल्डवाटर फिशरीज सोसायटी ऑफ इंडिया की ओर से वैज्ञानिकों को पुरस्कार भी बांटे गए।
संगोष्ठी के उद्घाटन अवसर पर सीआईएफई मुंबई के पूर्व निदेशक डॉ. दिलीप कुमार, डॉ. एसडी त्रिपाठी, भारतीय जीववैज्ञानिक सर्वे के अध्यक्ष डॉ. बीएन पांडे, सीआईएसएफ के निदेशक डॉ. सीएन रविशंकर, डॉ केके वास, डॉ. एस रायजादा, डॉ. एसके दास, डॉ. जेआर धांजे, सीडीओ प्रकाश चंद्रा समेत कई वैज्ञानिक एवं शोधार्थी थे। संगोष्ठी में मत्स्य पालकों, योजनाकारों, राज्य मत्स्य विभाग के अधिकारियों एवं देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए गैर सरकारी संगठनों से जुड़े लोगों ने भी हिस्सा लिया। संगोष्ठी के आयोजक सचिव डॉ. डी शर्मा ने सभी का आभार जताया। वैज्ञानिक सत्र में विषय-विशेषज्ञों ने संबंधित विषय पर पोस्टर-प्रस्तुतिकरण किया। इस दौरान परिसर में मात्स्यिकी संस्थानों की अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों को प्रदर्शित करने के लिए प्रदर्शनी-स्टाल भी लगाए गए।