कैसे मिल गई ऐसे वाहनों को फिटनेस
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हल्द्वानी। गौला नदी में चलने वाले वाहनों में से 60 प्रतिशत वाहन परिवहन विभाग के मानकों पर खरे नहीं उतरते हैं। इसके बाद भी विभाग इन वाहनों को फिटनेस प्रमाण पत्र दे देता है। इन वाहनों के कारण हर साल कई दुर्घटनाएं होती हैं। एक अक्तूबर से खनन सत्र शुरू हो रहा है। ऐसे में गौला नदी में 7500 वाहन सड़कों पर उतरेंगे। गौला के वाहनों की बात करें तो गौला में पंजीकृत वाहनों में से 60 प्रतिशत वाहन ऐसे हैं, जो मानकों के अनुसार सड़कों में उतर ही नहीं सकते। सवाल उठना लाजिमी है कि विभाग ऐसे वाहनों को कैसे फिटनेस प्रमाण पत्र दे रहा है। शुक्रवार को अमर उजाला की टीम ने गौला में पंजीकृत वाहनों का जायजा लिया। राजपुरा और गौला बाइपास रोड पर खड़े अधिकांश पंजीकृत डंपरों और ट्रकों में लाइटें नहीं थी। साथ ही इन गाड़ियों के केबिन और बॉडी पूरी तरह गल चुकी थीं।
कागजों में होती है फिटनेस
गौला से लेकर अधिकतर वाहनों की फिटनेस सिर्फ कागजों में होती है। परिवहन कार्यालय हल्द्वानी में दलाल हर समय सक्रिय रहते हैं। सूत्रों के मुताबिक दलाल फार्म में चेचिस नंबर घिसवा लेते हैं। और बिना गाड़ी देखे परिवहन विभाग के अधिकारी ले देकर गाड़ी की फिटनेस दे देते हैं। इसका उदाहरण गौला की गाड़ियों को देखकर लगाया जा सकता है।
हर साल ऐसे वाहनों से जाती है कई लोगों की जान
परिवहन विभाग और दलालों की मिलीभगत से हर साल अनफिट गाड़ियां सड़कों पर उतरती हैं। इन अनफिट गाड़ियों के कारण हर साल कई लोग जान गंवा बैठते हैं।
पिछले साल तक कैसे फिटनेस दी जाती थी, ये मेरी जानकारी में नहीं है। इस बार गौला नदी में कैंप लगाया जाएगा। वहीं हर गाड़ियों की फिटनेस देखी जाएगी। मानकों के अनुरूप वाहन नहीं होने पर फिटनेस नहीं दी जाएगी।
- राजीव मेहता, आरटीओ हल्द्वानी