नैनीताल। कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत ने मंगलवार को जिला विकास प्राधिकरण (डीडीए) कार्यालय में छापा मारा। इस दौरान कार्यालय में कई खामियां मिलीं। दस्तावेजों का रखरखाव ठीक नहीं मिला। प्राधिकरण की ओर से समन जारी करने के ऑफलाइन रिकॉर्ड भी नहीं मिले। पांच साल पहले दायर वाद में अब तक तारीख नहीं दी गई है। आयुक्त ने प्राधिकरण की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए एक सप्ताह में दस्तावेज सूचीबद्ध व वर्गीकृत कर संबंधित कर्मियों का स्पष्टीकरण प्राप्त करने के निर्देश डीएम को दिए हैं।
कुमाऊं आयुक्त रावत ने डीडीए कार्यालय में दस्तावेजों के रखरखाव और विभाग की ओर से की गई कार्रवाई संबंधित फाइलें मांगीं। प्राधिकरण सचिव विजयनाथ शुक्ल ने बताया कि एलडीए के समय के 946 व डीडीए बनने के बाद के 556 समेत 1502 मामलों में सुनवाई की जा रही है। सचिव स्तर पर 2650 मामले सुनवाई के लिए विचाराधीन हैं। 279 मामलों में सीलिंग के आदेश किए गए हैं जबकि विभाग की ओर से लगाई गई सील तोड़कर दोबारा काम करने पर आठ लोगों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कराया गया है।
आयुक्त ने ऑनलाइन व ऑफलाइन निस्तारित किए जा रहे वादों की जानकारी मांगी, लेकिन कार्यालय में इनका वर्गीकरण नहीं मिला। वाद रजिस्टर में अंकित केसों की फाइलें मंगाईं तो पता चला कि पांच वर्ष से भवन स्वामी को तारीख पर नहीं बुलाया गया। इस पर आयुक्त ने कर्मचारियों को फटकार लगाई और कहा कि वादी को तारीख पर नहीं बुलाकर कर्मचारी अवैध निर्माण को बढ़ावा दे रहे हैं।
उन्होंने डीएम को आंकड़ों और मामलों को वर्षवार, व्यावसायिक व निजी में वर्गवार सूचीबद्ध करवाने व संबंधित कर्मियों का स्पष्टीकरण लेने के निर्देश दिए। आयुक्त ने निर्देश दिए कि तय समय पर भवन मानचित्रों को स्वीकृति दी जाए, अगर मानक पूरे नहीं है तो किए जाएं। इस दौरान प्राधिकरण सहायक अभियंता सुधांशु सिंह, शिवम धीमन, अवर अभियंता हेम उपाध्याय व विपिन कुमार मौजूद रहे।