जिलाधिकारी दीपक रावत ने गुरुवार को कालाढूंगी में तहसील और उप कोषागार में छापा मारा। छापे में पंजिका, दैवीय आपदा पंजिका, नजूल भूमि, राजस्व गांव, खसरा खतौनियों और आनलाइन खतौनियों 143 पंजिका, सम्मन पंजिका का निरीक्षण किया। डीएम ने तहसीलदार द्वारा कर्मचारियों मेें कार्य विभाजन न किए जाने पर तहसीलदार को स्पष्टीकरण के साथ ही प्रतिकूल प्रविष्टि देने के निर्देश दिए। सम्मन तामीली में अनियमितता पर नाराजगी व्यक्त की गई। डीएम ने काम में लापरवाही बरतने पर दो इंजीनियरों का वेतन भी रोकने के निर्देश दिए हैं।
जिलाधिकारी ने सठ वार्षिक खतौनी निरीक्षण के दौरान कानूनगो और पटवारियों को शत-प्रतिशत खतौनियों का कंप्यूटरीकरण करने के निर्देश के साथ ही नियमित अद्यतन करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने दैवीय आपदा में तहसील को मिली धनराशि और खाता पासबुक का निरीक्षण किया। तहसीलदार ने बताया कि दैवीय आपदा में 20 लाख की धनराशि मिली थी, जिसमें से अवशेष धनराशि 17 लाख 92 हजार पासबुक खाते में है। जिलाधिकारी ने तहसील भवन परिसर का भी निरीक्षण किया।
आवासीय भवन जो कि 2012 में पूर्ण हो जाने चाहिए थे, अभी तक पूर्ण न होने पर नाराजगी जताई। कार्यदायी संस्था लोनिवि के पूर्व सहायक अभियंता आरसी पंत और वर्तमान सहायक अभियंता टीसी पांडे का अग्रिम आदेशों तक वेतन रोकने के निर्देश दिए। उन्होंने सहायक अभियंता को निर्देश दिए कि वे ठेकेदार द्वारा कार्य में अनावश्यक देरी किए जाने पर पांच प्रतिशत पेनल्टी डाली जाए। फिर भी त्वरित गति से कार्य नहीं होता है तो उसे ब्लैक लिस्टेड किया जाए। सहायक अभियंता पांडे ने आश्वासन दिया कि 15 मई तक आवासीय भवन पूर्ण कर हस्तगत कर दिया जाएगा।
डीएम ने उप कोषागार कालाढूंगी में भी छापा मारा। ट्रेजरी में आनलाइन बिल ट्रांसफर सिस्टम की जानकारी ली। कालाढूंगी थाने का भी निरीक्षण किया। मालखाना, असलाहखाना के साथ ही अपराध अंकन पंजिका, सम्मन पंजिका, असलाह पंजिका आदि का निरीक्षण किया। निरीक्षण में एसडीएम पंकज उपाध्याय, तहसीलदार जीके पंत, प्रशासनिक अधिकारी कमला पांडे, सहायक अभियंता लोनिवि टीसी पांडे मौजूद थे।
गिड़गिड़ाने लगे सहायक अभियंता
साहब वेतन मत रोकिए, बदनामी होती है। मीडिया वाले नाम छाप देंगे तो सबको पता चल जाएगा। गलती के लिए क्षमा कर दीजिये, आगे से ऐसा नहीं होगा। डीएम के सामने ठीक इसी तरह गिड़गिड़ाते हुए लोनिवि के सहायक अभियंता आरसी पंत डीएम के सामने गिड़गिड़ाने लगे। पर जिलाधिकारी ने एक नहीं सुनी। तहसील के न्यायिक लिपिक से प्रमाणपत्रों को जारी करने की प्रक्रिया पूछने पर वह बगलें झांकने लगे। इस पर डीएम बोले, सरकारी काम के नाम पर धंधेबाजी नहीं चलेगी।