हल्द्वानी। डीएम धीराज सिंह गर्ब्याल ने जमरानी बांध परियोजना के काम में तेजी लाने के लिए डूब क्षेत्र की भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए हैं। डीएम ने कहा कि डूब क्षेत्रवासियों के लिए ऊधमसिंह नगर के खुरपिया और प्राग फार्म में जमीन चयन की प्रक्रिया चल रही है। जमीन चयनित होते ही पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
जमरानी बांध परियोजना इकाई के अधिकारियों के साथ हुई बैठक में डीएम ने परियोजना के काम में अब तक हुई प्रगति की जानकारी ली। बांध परियोजना के अधिशासी अभियंता भारत भूषण पांडेय ने बताया कि एडीबी के सामाजिक और पुनर्वास विशेषज्ञ मानस मोहंती ने भी जिलाधिकारी से मुलाकात कर एडीबी की पुनर्वास नीति की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एडीबी की पुनर्वास नीति के तहत जमरानी परियोजना की पुनर्वास नीति में कुछ संशोधन किए जाएंगे।
खुरपिया और प्राग फार्म में जमीन चयन का काम लगभग पूरा हो गया है लेकिन अभी परियोजना इकाई को रिपोर्ट नहीं मिली है। प्रशासन से जमीन संबंधी रिपोर्ट मिलते ही पुनर्वास का काम शुरू कर दिया जाएगा और भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई भी शुरू की जाएगी। बैठक में परियोजना प्रबंधक अजय पंत भी मौजूद रहे।
एडीबी विशेषज्ञ ने ग्रामीणों के सुझाव लिए
हल्द्वानी। एशियन डेवलेपमेंट बैंक (एडीबी) के सामाजिक एवं पुनर्वास विशेषज्ञ मानस मोहंती ने जमरानी बांध के डूब क्षेत्र के गांवों का दौरा किया। आज उन्होंने पस्तोला में ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और उनसे सुझाव लिए। एडीबी विशेषज्ञ ने ग्रामीणों को बताया कि विस्थापित होने वाले सबसे गरीब, दिव्यांग या महिला मुखिया वाले परिवारों को एडीबी के मानकों के तहत अतिरिक्त सुविधाएं दी जाएंगी।
एडीबी के सामाजिक और पुनर्वास विशेषज्ञ के दौरे की जानकारी देते हुए प्रबंधक संजय कुमार ने बताया कि उन्होंने पस्तोला गांव में लोगों से सुझाव लिए। उनकी दिक्कतें भी सुनीं। बाद में उन्होंने बांध स्थल का दौरा कर कई जानकारियां लीं। एडीबी विशेषज्ञ ने पुनर्वास नीति में कुछ एडीबी के मानक शामिल करने की बात कही है। परियोजना के ईई भारत भूषण पांडेय ने बताया कि पुनर्वास नीति में एडीबी विशेषज्ञ की ओर से सुझाए गए बिंदुओं को शामिल कर संशोधन किया जाएगा।
जमरानी बांध पुनर्वास संघर्ष समिति के अध्यक्ष नवीन पलड़िया और जमरानी बांध संघर्ष समिति के डॉ. केदार पलड़िया ने विशेषज्ञ को ग्रामीणों की दिक्कतों से अवगत कराया। इस दौरान परियोजना इकाई के सामाजिक और पुनर्वास विशेषज्ञ अशोक सुयाल भी मौजूद रहे।