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बदहाल सबस्टेशन, खस्ताहाल व्यवस्था

Thu, 05 May 2016 12:46 AM IST
राजीव शुक्ला , हल्द्वानी।
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कमलुवगांजा सबस्टेशन - फोटो : अमर उजाला
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 पांच मई 2012 को काठगोदाम के 132केवी सबस्टेशन में हुए भीषण अग्निकांड को शायद पावर कारपोरेशन के अधिकारी भूल गए हैं। पिछले सप्ताह कमलुवागांजा 220केवी यार्ड के बाहर आग लगने से कठघरिया उपकेंद्र ठप हो गया था। कालाढूंगी उपकेंद्र में भी आग लगने पर फायर ब्रिगेड बुलानी पड़ी थी। अमर उजाला ने बुधवार को उपकेंद्रों पर जाकर पड़ताल की तो बदहाल उपकेंद्र और खस्ताहाल व्यवस्था नजर आई। सुभाष नगर उपकेंद्र पर जगह-जगह तार बिखरे पड़े थे। ये तार ऐसे थे जिनका कोई काम नहीं था। आग बुझाने की बाल्टियों में न तो रेता था और न ही पानी। बाल्टी में यदि कुछ मिला तो शराब की खाली बोतल। टीपी नगर और कमलुवागांजा उपकेंद्र पर भी व्यवस्था बदहाल थी। आग बुझाने के उपकरण जहां-तहां पड़े थे और बाल्टियां खाली थीं। 
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फोटो === टीपी नगर उपकेंद्र 
टीपी नगर उपकेंद्र पर आग बुझाने के लिए बाल्टियां खाली पड़ी थीं। आग बुझाने के लिए तीन फायर एस्टिंगगुयसर साढ़े चार किलो, पांच किलो और नौ किलो के थे। ये इधर-उधर पड़े हुए थे। इस पर किसी भी तरह की कोई तारीख नहीं थी। इनकी रीफिलिंग कब हुई और कब एक्सपायरी डेट है, इसका भी पता नहीं था। यार्ड में सूखी घास नजर आ रही थी। सूखी घास पर अगर एक चिंगारी धोखे से पड़ जाए तो कोई बड़ा हादसा हो सकता है। 

 कमलुवागांजा उपकेंद्र 
कमलुवागांजा उपकेंद्र की हालत तो सबसे बदहाल मिली। दरवाज उखड़ने को थे। उपकेंद्र के अंदर सामान इधर-उधर पड़ा हुआ था। दो फायर एस्टिंगगुयसर पड़े थे, उनकी भी समय सीमा समाप्त हो चुकी थी। उपकेंद्र में कहीं भी मैट नहीं बिछी थी। उपकेंद्र में आग बुझाने के लिए कहीं भी बाल्टियां नजर नहीं आईं। 
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कालाढूंगी उपकेंद्र 
कालाढूंगी उपकेंद्र शहर के बीचोबीच है। दो फायर एस्टिंगगुयसर बाहर पड़े हुए थे। उन पर कोई तारीख सनद नहीं थी। बाल्टियों का भी कहीं अता-पता नहीं था। पिछले सप्ताह आग लगने के दौरान फायर ब्रिगेड बुलानी पड़ी थी। इसके बावजूद व्यवस्था में छेद ही छेद नजर आ रहे थे। कोई बड़ा हादसा होने पर आसपास का क्षेत्र भी चपेट में आ सकता है। 

सुभाष नगर उपकेंद्र 
सुभाष नगर उपकेंद्र में पुराने तार फीडरों के पास और ऊपर रखे हुए थे। फीडरों के पीछे स्टैंड पर टंगी बाल्टियां खाली थी और एक बाल्टी में कुछ मिला तो वो थी शराब की बोतल। उपकेंद्र के यार्ड पर सूखे पत्ते और घास भी नजर आई। फायर एस्टिंगगुयसर भी जहां-तहां पड़े हुए थे। किसी भी बाल्टी में पानी या रेत नहीं थी। कोई अनहोनी होने पर रेत और पानी के लिए बंगले झांकने के सिवा कोई दूसरा रास्ता नहीं होगा। 
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कोट 
सभी उपकेंद्रों पर व्यवस्थाएं चाक-चौबंद हैं। कहीं पर कोई कमी नहीं है। सुभाष नगर नगर क्षेत्र के सभी उपकेंद्रों में सबसे अच्छा सबस्टेशन है। 
नवीन मिश्रा, अधिशासी अभियंता, नगर 

कोट 
जहां-जहां व्यवस्थाएं खराब होंगी, वहां सुधार कराया जाएगा। आग बुझाने के इंतजाम जिन उपकेंद्रों पर नहीं होंगे, वहां कराई जाएगी। 
अमित आनंद, अधिशासी अभियंता, ग्रामीण 
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220 और 132 की व्यवस्था चाक-चौबंद 
हल्द्वानी। कमलुवागांजा 220केवी और 132केवी काठगोदाम में आग से निपटने के लिए चाक-चौबंद व्यवस्था की गई है। कमलुवागांजा में फायर हाइड्रेंट सिस्टम लगाया गया है। जबकि प्रेशर से पानी फेंकने के लिए 40 और 30 हार्स पावर की दो मोटरें लगी हैं। टयूबवेल से पानी लेने के साथ ही ओवरहेड टैंक में भी पानी भरा रहता है। एक अंडरग्राउंड टैंक भी बनाया गया है जो 12 फीट गहरा है। तेल की आग बुझाने केे लिए फोम की अलग से व्यवस्था की गई है। 132केवी काठगोदाम में पांच मई 2012 के हादसे के बाद नाइट्रोजन इंजेक्शन फायर प्रोवेंशन सिस्टम (एलआईएफएस) लगाया गया है। आग लगने पर नाइट्रोजन ट्रांसफार्मर में भर जाएगी और आग नहीं फैलेगी। साथ ही, एक अंडरग्राउंड टैंक बनाया गया है। इसमें ट्रांसफार्मर का तेल चला जाएगा। साथ ही, अग्निरोधक दो दीवारें भी बनवाई गई हैं। पिटकुल के अधीक्षण अभियंता पीके भास्कर ने बताया कि उक्त सिस्टम कमलुवागांजा में लगाने के लिए 80 लाख रुपये का प्रस्ताव भेजा गया है।
 
यार्ड के बाहर की झाड़ियां हैं खतरे की घंटी 
हल्द्वानी। कमलुवागांजा 220केवी यार्ड के बाहर जमीन पर खड़ी सूखी घास और पेड़ खतरे की घंटी बन सकते हैं। यार्ड के बाहर निगरानी करने के लिए एक टावर बनाया गया है। पिटकुल का एक कर्मी टावर से बाहर निगरानी रखता है और हल्की सी आग दिखने पर तत्काल अधिकारियों को सूचित करता है। 
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