फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सिर्फ एक फैकल्टी के भरोसे विभाग, कई जांचें बंद

विज्ञापन
हल्द्वानी बेस अस्पताल रखा ऑक्सीजन भंडारण टैंकर। अमर उजाला
विज्ञापन
हल्द्वानी। मेडिकल कॉलेज के कई विभाग सिर्फ एकला चलो की राह पर चल रहे हैं। वर्तमान में स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में फैकल्टी के नाम पर सिर्फ एक डॉक्टर है। यही हाल कमोबेश नेत्र रोग विभाग का है।
विज्ञापन

आलम यह है कि मेडिकल कॉलेज के विभागों में चिकित्सकों की कमी के चलते स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में होने वाली कोलोनोस्कोपी जांच नहीं हो पा रही है। दूरस्थ क्षेत्रों में मेमोग्राफी जांच के लिए बस में व्यवस्था की गई, यह बस भी शो पीस बनी हुई है। पेन क्लीनिक में मरीजों की भर्ती नहीं हो पा रही है। अन्य विभागों का हाल भी खराब है। स्वास्थ्य सुविधाओं के अलावा चिकित्सा-शिक्षा (मेडिकल कॉलेज की टीचिंग) का काम भी प्रभावित हो रहा है।
स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग
- मेडिकल कॉलेज के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग के कई डॉक्टरों (फैकल्टी) का तबादला अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज में किया गया। विभाग में केवल तीन फैकल्टी बची हैं। इनमें दो अवकाश पर हैं, केवल एक फैकल्टी और एसआर, जूनियर रेजीडेंट डॉक्टरों के भरोसे विभाग चल रहा है। जबकि प्रतिदिन औसतन 15 तक डिलीवरी होती है और ओपीडी में सौ तक रोगी पहुंचते हैं।
विज्ञापन

चिकित्सकों की कमी के चलते विभाग में कैंसर की जांच के लिए होने वाली कोलोनोस्कोपी जांच भी बंद पड़ी है। विभाग में ही गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड हो जाते हैं, वह भी नहीं हो पा रहे हैं। इलेक्टिव सर्जरी (इमरजेंसी के अलावा डेट देकर होने वाले ऑपरेशन) भी प्रभावित हो रही है।
नेत्र रोग विभाग
नेत्र रोग विभाग से भी कई डॉक्टरों का तबादला दूसरे मेडिकल कॉलेज में किया गया। यहां पर फैकल्टी के तौर पर दो डॉक्टर हैं, इनमें विभागाध्यक्ष अवकाश पर हैं। केवल एक फैकल्टी के सहारे विभाग है। यहां पर आई बैंक और नेत्र प्रत्यारोपण की सुविधा शुरू करने की योजना है। ऐसे में जल्द ही यह सुविधा शुरू हो पाएगी, इसे लेकर सवाल बना हुआ है। माइक्रोबायलॉजी विभाग में जीनोम सीक्वेसिंग (ओमिक्रॉन वायरस आदि की जांच) के लिए करोड़ों की मशीन खरीदी गई। अभी विधिवत रूप से मशीन से जांच के लिए एक अन्य प्रक्रिया के पूरा होने का इंतजार है।
पेन क्लीनिक
स्वामी राम कैंसर इंस्टीट्यूट में एनस्थीसिया विभाग के सहयोग से पेन क्लीनिक की ओपीडी और आईपीडी दोनों शुरू की गई थीं। कोरोना के बाद केवल ओपीडी हो पा रही है। बस में मेमोग्राफी जांच की मशीन लगाकर दूरस्थ क्षेत्रों में जांच सुविधाओं को पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया। पर यह बस भी मेडिकल कॉलेज परिसर में शो पीस बनी हुई है। रेडियोलॉजी विभाग में फैकल्टी न होने से अल्ट्रासाउंड जांच महीनों से बंद है।
बेस अस्पताल का हाल भी खराब
हल्द्वानी। बेस अस्पताल का हाल भी जुदा नहीं है। यहां भी डॉक्टरों के कई पद रिक्त हैं। बेस अस्पताल के अधीन चलने वाला हार्ट सेंटर खंडहर हो चुका है। यहां पर ऑक्सीजन सिलिंडर भेजा गया था, जिसका उपयोग आज तक नहीं हो सका है। उसको बस एक स्थान से हटाकर दूसरे स्थान पर रखा जाता है।
कोट
मेडिकल कॉलेज के कई विभागों में चिकित्सकों की कमी है, इसके चलते कुछ असर पड़ा है। जुलाई में डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए इंटरव्यू किए जाएंगे। डॉक्टरों के मिलने से सेवाओं में और सुधार आ सकेगा। - डॉ. अरुण जोशी, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज, हल्द्वानी
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें