पिथौरागढ़। सीमांत की एक और गर्भवती लचर स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की भेंट चढ़ गई। समय से उपचार न मिलने के कारण एक प्रसव पीड़िता की मौत हो गई। जम्कू गांव की एक प्रसव पीड़िता को प्रसव पीड़ा बढ़ने के बाद धारचूला संयुक्त अस्पताल लाया गया। यहां प्रसव पीड़िता की तबियत ज्यादा खराब होने के कारण उसे हायर सेंटर पिथौरागढ़ रेफर किया गया था, लेकिन उसकी अस्पताल पहुंचने से पहले ही गुड़ौली के पास मौत हो गई।
धारचूला ब्लॉक के जम्कू गांव निवासी नंदा देवी (29) पत्नी जीवन सिंह को प्रसव पीड़ा उठने के बाद धारचूला अस्पताल लाया गया था। नंदा की तबियत ज्यादा खराब होने के बाद उसे हायर सेंटर पिथौरागढ़ जिला अस्पताल रेफर किया गया था। उसे अस्कोट की एंबुलेंस से जिला महिला अस्पताल लाया जा रहा था। अधिक रक्तस्राव होने के कारण गुड़ौली गांव के पास प्रसव पीड़िता ने दम तोड़ दिया। प्रसव पीड़िता की सांसे थमने के बाद 108 कर्मी प्रसव पीड़िता को डीडीहाट अस्पताल लाए। यहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। थानाध्यक्ष हिमांशु पंत ने बताया कि पंचनामा भरने के बाद शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।
जम्कू गांव से अस्पताल पहुंचने में हुई देरी
पिथौरागढ़। धारचूला विकासखंड का जम्कू गांव काफी दूरी पर स्थित है। सड़क सुविधा न होने के कारण परिजन प्रसव पीड़िता को समय से अस्पताल नहीं पहुंचा सके। अस्पताल पहुंचते ही प्रसव पीड़िता की तबियत ज्यादा खराब हो गई थी। इसके बाद चिकित्सकों ने प्रसव पीड़िता को हायर सेंटर रेफर करना पड़ा।
कब तक अकाल मृत्यु का ग्रास बनती रहेंगी प्रसव पीड़िताएं
पिथौरागढ़। सीमांत जिले की बदहाल स्वास्थ्य सुविधाओं का सर्वाधिक खामियाल गर्भवती महिलाओं को भुगतना पड़ रहा है। आए दिन अस्पताल में प्रसव के दौरान गर्भवती महिलाओं की मौत के मामले बढ़ते जा रहे हैं।