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High Court: दहेज उत्पीड़न की आपराधिक कार्यवाही रद्द, देहरादून का है मामला

Thu, 12 Feb 2026 12:37 PM IST
गायत्री जोशी संवाद न्यूज एजेंसी

सार

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने तलाक और पुनर्विवाह के बाद लंबित दहेज उत्पीड़न मामले की आपराधिक कार्यवाही को निरस्त कर दिया।
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नैनीताल हाईकोर्ट।
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विस्तार
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 उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण आदेश में वैवाहिक विवाद से जुड़े आपराधिक मामले की संपूर्ण कार्यवाही को निरस्त कर दिया। न्यायमूर्ति आलोक महरा की एकलपीठ ने न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम, देहरादून की अदालत में लंबित चार्जशीट, समन आदेश तथा आपराधिक वाद की समस्त कार्यवाही को रद्द कर दिया।

मामले के अनुसार देहरादून निवासी अरविंद सेमवाल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि आवेदक और प्रतिवादी संख्या का विवाह 28 सितंबर 2009 को हुआ था, जिससे एक संतान का जन्म हुआ। बाद में आपसी स्वभावगत मतभेद एवं वैवाहिक कलह के कारण दोनों अलग रहने लगे। वर्ष 2016 में प्रतिवादी ने आवेदकों के विरुद्ध धारा 498, 323 आईपीसी तथा दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा के तहत आपराधिक शिकायत दर्ज कराई। आवेदकों की ओर से कहा गया कि आरोप असत्य एवं अतिरंजित थे। कार्यवाही के दौरान आवेदक ने तलाक की याचिका भी दायर की थी, जिसे 2018 में न्यायालय ने स्वीकार कर लिया था।

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विवाह विच्छेद के उपरांत प्रतिवादी ने पुनर्विवाह कर लिया था। कोर्ट ने पक्षों की सुनवाई के बाद कहा कि यह मामला वैवाहिक विवाद से उत्पन्न हुआ था, जो अब समाप्त हो चुका है। ऐसे में आपराधिक कार्यवाही जारी रखना आवेदकों के लिए अनावश्यक उत्पीड़न का कारण बनेगा और न्यायालय की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा। कोर्ट ने वाद संख्या की संपूर्ण कार्यवाही निरस्त कर दी।

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