नैनीताल। नैनीताल जिले के सुदूरवर्ती ओखलकांडा ब्लाक के देवस्थल क्षेत्र में स्थापित एशिया की सबसे बड़ी चार मीटर व्यास की लिक्विड मिरर टेलीस्कोप (दूरबीन) के उद्घाटन में कोरोना का ग्रहण लगा हुआ है। दूरबीन के उद्घाटन के लिए एरीज के वैज्ञानिकों को अब ओमिक्रान के खात्मे का इंतजार है।
बता दें कि खगोलीय अध्ययन और उससे जुड़े नए शोध कार्यों के लिए आर्यभट्ट प्रेक्षण एवं शोध संस्थान (एरीज) नैनीताल प्रबंधन के प्रयासों के बाद कोरोना काल से पहले बेल्जियम और कनाडा के खगोल संस्थानों के साथ मिलकर एशिया की सबसे बड़ी चार मीटर व्यास की लिक्विड मिरर टेलीस्कोप दूरबीन की स्थापना की पहल की गई थी। इसकी स्थापना के लिए नैनीताल जिले के देवस्थल का चयन किया गया था। वर्ष 2020 के शुरूआती महीने में खगोल वैज्ञानिकों ने बेल्जियम में निर्मित इस दूरबीन को देवस्थल में लगाने का काम शुरू किया। कुछ माह के प्रयासों के बाद दूरबीन स्थापित कर ली गई।
लगभग पचास करोड़ से अधिक लागत की इस दूरबीन का उद्घाटन वर्ष 2020 में ही होना था। उद्घाटन कार्यक्रम में बेल्जियम और कनाडा के खगोल वैज्ञानिकों को भी यहां आना है। मार्च 2020 में कोराना के कारण हुए लॉकडाउन के कारण उद्घाटन नहीं हो सका। अब देश में ओमिक्रान के दस्तक देने से उद्घाटन फिर लटक गया है। एरीज के निदेशक डॉ. दीपांकर बनर्जी का कहना है कि चार मीटर व्यास वाली यह दूरबीन मरकरी आधारित तकनीक से निर्मित है जिसका रिफ्लेक्शन मिरर के मुकाबले कहीं अधिक बेहतर होता है। इससे पूर्व देवस्थल में लगाई गई 3.6 मीटर व्यास वाली दूरबीन कांच से निर्मित है। इस नई दूरबीन से अंतरिक्ष में होने वाली हलचलों के साथ-साथ तारों, आकाश गंगाओं को अधिक साफ और सुगमता से आब्जर्व किया जा सकता है। डॉ. बनर्जी का कहना है कि ओमिक्रान थमने के बाद ही बेल्जियम और कनाडा के खगोल वैज्ञानिक भारत आ सकेंगे और उसके बाद परिस्थितियां सामान्य होने पर ही दूरबीन का उद्घाटन होगा। जिसमें केंद्रीय मंत्री और गणमान्य लोगों को आमंत्रित किया जाएगा।
पीएम मोदी ने किया था 3.6 मिरर टेलीस्कोप का उद्घाटन
नैनीताल। यह पहला मौका नहीं है जब एरीज के वैज्ञानिक देवस्थल में कोई दूरबीन स्थापित कर रहे हैं। इससे पहले भी एरीज समेत कई अन्य देशों के खगोल वैज्ञानिक देवस्थल में 3.6 मीटर व्यास वाली दूरबीन स्थापित कर चुके हैं। 3.6 मीटर व्यास वाली इस दूरबीन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बेल्जियम के प्रधानमंत्री चाल्स मिथेल ने 30 मार्च 2016 को संयुक्त रूप से बेल्जियम की राजधानी ब्रुसेल्स से आन लाइन किया था। उसके बाद से देवस्थल में 3.6 मीटर व्यास वाली दूरबीन खगोलीय अध्ययन में मददगार साबित हो रही है।