लोहाघाट (चंपावत)। ऋषेश्वर मंदिर के धर्मशाला विवाद में तनाव की आशंका के बीच सोमवार को शांति रही। नवनिर्मित धर्मशाला पर मंदिर समिति के कब्जा करने का आरोप लगा बृहस्पतिवार से आमरण अनशन कर रहे स्वामी मोहनानंद के शिष्य ऋषेश्वारनंद ने धर्मशाला का लोकार्पण होने पर सोमवार को प्राण त्यागने की चेतावनी दी थी। इसे उन्होंने वापस ले लिया।
प्रशासन की इजाजत न मिलने पर सोमवार को धर्मशाला का उद्घाटन नहीं हुआ। उद्घाटन के बजाय मंदिर समिति ने नवनिर्मित धर्मशाला का शुद्धिकरण कार्यक्रम किया। फीता काटने और शिलापट लगाने का कार्यक्रम भी टाल दिया गया।
कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा। एसडीएम अनिल गर्ब्याल, सीओ अशोक कुमार, तहसीलदार विजय गोस्वामी और एसओ मनीष खत्री के नेतृत्व में लोहाघाट, पाटी, पंचेश्वर, चंपावत की पुलिस समेत पीएसी की एक प्लाटून वहां तैनात थी।
नवनिर्मित धर्मशाला के शुद्धिकरण के बाद 12 गांवों से आए देवडांगरों ने श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दिया। पंडित प्रकाश चंद्र पुनेठा, पंडित नवीन बगौली के पौरोहित्य और मंदिर समिति के अध्यक्ष प्रहलाद सिंह मेहता की अगुवाई में पूजा हुई। ढोल-नगाड़ों की थाप के बीच सुबह सूर्य कुंड में देवडांगरों के स्नान के बाद, नवनिर्मित धर्मशाला में पूजा-अर्चना, हवन, कन्या पूजन और प्रसाद बांटा गया।
सावन का अंतिम सोमवार होने के कारण सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला चला। इस मौके पर विधायक पूरन सिंह फर्त्याल, चेयरमैन गोविंद वर्मा, मंदिर समिति महामंत्री प्रकाश राय, कैलाश बगौली, महेंद्र ढेक, सतीश चंद्र पांडेय सहित मंदिर समिति के सदस्य थे।
नव निर्मित धर्मशाला का उद्घाटन कार्यक्रम न होने पर मंदिर के महंत स्वामी मोहनानंद के शिष्य ऋषेश्वरानंद ने सोमवार को प्राण त्यागने का निर्णय वापस ले लिया। धर्मशाला पर कब्जे को लेकर उनका आमरण अनशन जारी है। ऋषेश्वरानंद का कहना है कि गीता भवन में पहले की तरह संतों को जगह दी जाए।
साथ ही नवनिर्मित आश्रम से उनके गुरु स्वामी मोहनानंद के आसन को बहाल करने की भी मांग की। वहीं, प्रशासन ने मंदिर परिसर में प्रवेशबिंदु पर लगी जंजीर हटाने और उखाड़ा गया बिजली का मीटर लगाने की बात मान ली। एसडीएम अनिल गर्ब्याल और स्वामी मोहनानंद की वार्ता के बीच ये सहमति बनी।
15 मिनट कमरा बंद कर बैठे स्वामी मोहनानंद, पुलिस के हाथपांव फूले
लोहाघाट (चंपावत)। नवनिर्मित भवन के शुभारंभ पर स्वामी मोहनानंद के शिष्य की प्राण त्यागने की चेतावनी के बाद पुलिस फोर्स और दमकल विभाग सुरक्षा में तैनात थी।
सुबह के वक्त धर्मशाला शुद्धिकरण कार्यक्रम शुरू होने के कुछ देर बाद एकाएक बाबा मोहनानंद ने कमरे के भीतर जाकर खुद को बंद कर दिया।
इस कदम से पुलिस प्रशासन के हाथपांव फूल गए। आनन फानन सीओ अशोक कुमार सिंह ने बाबा से दरवाजा खोलने का अनुरोध करने के साथ उन्हें समझाया। करीब मिनट 15 बाद स्वामी दरवाजा खोलकर कमरे से बाहर निकले, तब पुलिस प्रशासन ने राहत की सांस ली।
अदालत में आज होगी सुनवाई
चंपावत। ऋषेश्वर महादेव मंदिर के गीता भवन (धर्मशाला) के स्वामित्व को लेकर मामला पिछले कुछ महीनों से अदालत में लंबित है।
स्वामी मोहनानंद के अधिवक्ता यतीश चंद्र जोशी ने सोमवार को सिविल जज की अदालत में प्रार्थनापत्र देकर धर्मशाला की चाभी प्रशासन के सुपुर्द करने का आग्रह किया।
अधिवक्ता जोशी ने कहा कि धर्मशाला पर मंदिर समिति के कब्जे के खिलाफ स्वामी मोहनानंद के शिष्य ऋषेश्वरानंद 13 दिन से अनशन पर है। अन्न त्याग करने से उनकी सेहत भी बिगड़ रही है।
विवाद के चलते धर्मशाला भवन के शुभारंभ की भी प्रशासन ने इजाजत नहीं दी। अधिवक्ता जोशी ने कहा कि विवाद पर अदालत का अंतिम फैसला आने तक धर्मशाला की चाभी प्रशासन के पास रहनी चाहिए। इस मामले में मंगलवार को सुनवाई होगी।
लोहाघाट में ऋषेश्वर मंदिर के समीप सूर्य कुंड में स्नान करते देव डांगर।- फोटो : LOHAGHAT
लोहाघाट में नव निर्मित धर्मशाला के शुद्घिकरण कार्यक्रम के दौरान पूजा अर्चना में शामिल देव डांगर- फोटो : LOHAGHAT