मेेडिकल कॉलेज गोरखपुर में ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध कराने वाली कंपनी का संजाल राजकीय मेेडिकल कॉलेज (जीएमसी) में भी फैला है। प्रतिबंध लगने के बावजूद नाम बदलकर जीएमसी को धड़ल्ले से उपकरण भारी मात्रा में सप्लाई किए गए। कई उपकरण तो लगने के कुछ दिनों ही खराब होने लगे।
गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में पुष्पा सेल्स के पास ऑक्सीजन सप्लाई का काम था। पुष्पा सेल्स के तार जीएमसी हल्द्वानी से भी जुड़े हैं। मेडिकल कॉलेज का राजकीयकरण होने से पहले ट्रस्ट के समय से एसएस मेडिकल लखनऊ के नाम से उपकरण और मेडिकल फर्नीचर की आपूर्ति कर रहा था। बायोमेडिकल कचरा प्लांट भी इसी फर्म ने लगाया था। प्लांट की हालत भी अच्छी नहीं थी और अकसर खराब हो जाता था। कुछ समय बाद कंपनी को काली सूची में डाल दिया था। इसके बाद एसएस मेडिकल सिस्टम प्राइवेट लिमिटेड भीमताल के नाम से कंपनी बनाई गई और काम शुरू किया गया।
सूत्रों की मानें तो ट्राली, मोर्चरी टेबल, ईसीजी मशीन की आपूर्ति का टेंडर और कोटेशन के जरिये की। ईसीजी मशीनें खरीदने के कुछ समय बाद ही खराब हो गई थीं। ब्लड प्रेशर उपकरण, अल्ट्रासाउंड मशीन, एक्स रे व्यू बॉक्स, याग लेजर मशीन नेत्र रोग विभाग के लिए, डीप फ्रीजर ब्लड बैंक के लिए, बेड साइड मॉनीटर, आईसीयू बेड, स्ट्रेचर, ट्रॉली, रिवाल्विंग स्टूल आदि की सप्लाई की। कंपनी कुछ मशीनों की वार्षिक रखरखाव का ठेका (एएमसी) और वृहद रखरखाव का ठेका (सीएमसी) भी देख रही है।
कंपनी को आंध्रप्रदेश में भी मई-जून 2015 में काली सूची में डाला गया था। सवाल ये उठता है कि एक बार प्रतिबंधित होने के बाद कंपनी के नाम बदलने पर इतनी मेहरबानी क्यों दिखाई गई और करोड़ों के उपकरण क्यों खरीदे गए?
ये मामला मेरी समय का नहीं है। मेरे समय में कोई खरीद नहीं हुई है। सोमवार को कंपनी की आपूर्ति सूची निकलवाई जाएगी। साथ ही एएमसी और सीएमसी का रिकॉर्ड भी निकाला जाएगा। मामले की गहनता से जांच कराई जाएगी।
डॉ. सीपी भैसोड़ा
प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कॉलेज, हल्द्वानी।