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सरकारी जमीन को लीज पर देने से पहले विज्ञप्ति निकालना अनिवार्य

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प्रतीकात्मक फोटो
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नैनीताल। अधिकारियों व निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की मिलीभगत से सरकारी जमीन को गुपचुप तरीके से लीज पर लेने के मामले में दायर याचिका पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने सरकार को सरकारी जमीन की लीज प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी कर टेंडर जारी करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा है कि जमीन को लीज पर देने से पहले पब्लिक निविदा नोटिस की विज्ञप्ति निकालनी अनिवार्य होगी, जिसमें शुल्क का निर्धारण भी करना होगा।
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कोर्ट ने कहा कि अगर इस आदेश के खिलाफ कार्य किया गया या तय प्रक्रिया का अनुपालन नहीं किया गया तो यह असंवैधानिक माना जाएगा। कोर्ट ने इस मामले में एकलपीठ के आदेश को सही माना तथा इस आदेश के खिलाफ दायर स्पेशल अपील को खारिज कर दिया।
मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार लीजधारक भाव सिंह ने हाईकोर्ट में स्पेशल अपील दायर कर कहा था कि पूर्व में एकलपीठ के समक्ष मसूरी निवासी सुंदर सिंह, रमेश सिंह और
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अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि 15 जुलाई 2016 को मसूरी के कैंपटी फॉल में बंगलो को भाव सिंह ने 30 साल के लिए लीज पर दे दिया गया था। याचिका में कहा गया कि सरकार ने जमीन की लीज को गलत तरीके से दिया है। इसलिए इसको निरस्त किया जाए। अपील में कहा कि 22 अक्तूबर को हाईकोर्ट की एकलपीठ ने सरकार द्वारा दी गई लीज को गलत ठहराया था। एकलपीठ के इस आदेश को लीजधारक भाव सिंह ने स्पेशल अपील दायर कर चुनौती दी थी। पक्षों की सुनने के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि जमीन को लीज पर देने से पहले पब्लिक निविदा नोटिस की विज्ञप्ति निकालनी अनिवार्य होगी, जिसमें शुल्क का निर्धारण भी करना होगा। कोर्ट ने कहा कि अगर इस आदेश के खिलाफ कार्य किया गया या तय प्रक्रिया का अनुपालन नहीं किया गया तो यह असंवैधानिक माना जाएगा।
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