हाईकोर्ट के कड़ा रुख अपनाने पर शासन ने उप कारागार में नया ट्यूबवेल लगाने की मंजूरी दे दी है। ट्यूबवेल पर 37 लाख की लागत आएगी। इस व्यवस्था से कैदियों के पानी की समस्या हल होने की संभावना है। इधर, ऊधमसिंह नगर में नई जेल बनाने के मामले में शासन ने मंजूरी नहीं दी है।
हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति आलोक सिंह कुछ माह पहले उपकारागार का निरीक्षण करने के लिए आए थे। उस समय बंदियों ने पानी की समस्या बताई थी। इस पर उन्होंने जेल में ट्यूबवेल लगाने के लिए शासन को पत्र भेजने के निर्देश दिए थे। निरीक्षण के बाद जेल अधीक्षक ने ट्यूबवेल का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेज दिया। बताया गया कि जेल में क्षमता से तीन गुना अधिक कैदी हैं, जिनके समक्ष पानी की समस्या है।
न्यायमूर्ति ने इस समस्या को जनहित याचिका के रूप में ले लिया। एक जून को अदालत में पेश होने के लिए जेल अधीक्षक मनोज आर्या भी गए थे। अदालत ने ट्यूबवेल नहीं लगाने पर नाराजगी जताई थी। इसके बाद जेल अधीक्षक ने अदालत की मंशा से शासन को अवगत कराया। जेल अधीक्षक को बुधवार को सूचना मिली है कि शासन ने ट्यूबवेल लगाने की मंजूरी दे दी है। न्यायमूर्ति ने ऊधमसिंह नगर में नया जेल बनाने के लिए भी कहा था, लेकिन जमीन चिन्हित होने के बावजूद जेल के निर्माण का प्रस्ताव शासन में लंबित है।