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न मशीनें चलाने की फिक्र न बिल्डिंग खोलने की चिंता

Mon, 08 Jun 2015 12:36 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हल्द्वानी
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मरीजों को सुविधाएं देने के लिए न शासन संजीदा है और न ही बेस अस्पताल प्रशासन। लाखों रुपये की मशीनें स्टोर में पिछले नौ वर्षों से जंक खा रही है। सरकारी अस्पताल में मशीनें होने के बावजूद मरीजों को प्राइवेट में जांच करानी पड़ रही है।
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बेस अस्पताल में वर्ष 2007 में लेप्रोस्कोपी मशीन आई थी। मशीन का प्रयोग कुछ समय तक डा. केपी कुनियाल ने किया था। बेस अस्पताल के अंदर चल रही लामबंदी और व्यवस्था से डा. कुनियाल भी हार गए और उन्होंने अपनी सेवाएं निजी अस्पताल को देनी शुरू कर दीं। मेमोग्राफी की मशीन भी अपने उद्धार की बांट जोह रही है। दूसरी और पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी के कार्यकाल में स्वास्थ्य मंत्री रहे तिलक राज बेहड़ के करीबी को नई बिल्डिंग का ठेका मिला था। खामियां के साथ नई बिल्डिंग का काम पूरा कर बेस अस्पताल प्रशासन को सौंप दिया गया।

अस्पताल प्रशासन ने भी खामियों पर सवाल उठाना मुनासिब नहीं समझा और अब तक नई बिल्डिंग में ताला लटक रहा है। बेस अस्पताल के सीएमएस डा. एससी पंत का कहना है कि रेडियोलाजिस्ट न होने के कारण मेमोग्राफी मशीन नहीं चल पा रही है, जबकि डाक्टरों के अभाव में अन्य मशीनें बंद पड़ी हैं। मशीनें न चलने को लेकर कई बार आडिट के दौरान भी आपत्ति लगी। इस संबंध में शासन को भी लिखा जा चुका है, मगर कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि टेक्नीशियन न होने के कारण सीटी स्कैन मशीन भी नहीं चल पाई है।
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व्यक्तिगत लाभ पहुंचाना सेवा नियमावली का उल्लंघन
बेस अस्पताल में पड़े छापे के दौरान मिली अनियमितता की जांच प्रशासन बहुत गंभीरता से कर रहा है। सूत्रों के अनुसार सरकारी सेवा में रहते हुए अगर किसी को व्यक्ति लाभ पहुंचाया जाता है तो यह सेवा नियमावली का उल्लंघन है। साथ ही आरोप सिद्ध होने पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (पोको) के तहत मामला दर्ज हो सकता है। प्रशासन मौके से मिले नंबरों समेत अन्य सभी बिंदुओं पर जांच कर रहा है। जरूरत पड़ने पर पर्ची पर मिले नंबरों की काल डिटेल भी निकलवाई जा सकती है।

सचिवालय ने भी लिया संज्ञान
कुमाऊं के सबसे बड़े बेस और एसटीएच की लगातार आ रही निगेटिव रिपोर्ट को सचिवालय ने भी संज्ञान में लिया है। सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री कार्यालय से जिला प्रशासन को गंभीरता से मामले की जांच करने के निर्देश दिए हैं। माना जा रहा है कि शासन भी सख्त कार्रवाई कर लापरवाही और मनमानी करने वालों को संदेश देने के मूड में है।

न आईवी स्टैंड पूरे और न वार्ड में हैं कूलर
बाल रोग वार्ड में 25 बेड हैं, जबकि आईवी स्टैंड 12 हैं। डायरिया के कारण बेड फुल होने पर एक आईवी स्टैंड पर दोनों ओर बॉटल लटकाकर मरीजों को ग्लूकोज चढ़ाया जाता है। डीएम के छापे के दौरान समाजसेवी प्रेम बेलवाल ने आईवी स्टैंड, वार्डों में कूलर लगवाने की मांग की थी। बेलवाल ने वर्षों से बंद पड़ी लाखों रुपये की सीटी स्कैन मशीन शुरू कराने को कहा था। डीएम ने सीएमएस को चिकित्सा प्रबंधन समिति में आवश्यक उपकरण खरीदने का प्रस्ताव देने के निर्देश दिए थे।
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