वन विभाग जंगलों में अतिक्रमण हटाने के लिए अभियान चला रहा है। अब जंगलों में गुर्जरों की खेती पर शिकंजा कस गया है। तराई केंद्रीय, तराई पश्चिमी और तराई पूर्वी वन प्रभाग में खेती पर रोक लगा दी गई है।
तराई पश्चिम वन प्रभाग के आमपोखरा,उत्तरी जसपुर, दक्षिण जसपुर, बैलपड़ाव, रामपुर रेंज समेत अन्य इलाकों में जंगल में खेती होती है। यहां पर करीब 20 खत्ते थे और एक अनुमान के करीब सौ एकड़ से अधिक इलाके में खेती होती थी।
इसी तरह तराई केंद्रीय वन प्रभाग के टांडा रेंज, चूहा खत्ता, पीपलपड़ाव, तराई पूर्वी वन प्रभाग के रनसाली रेंज समेत अन्य इलाकों में गुर्जर खेती करते थे। वनाधिकारियों के अनुसार 2015 में कोर्ट ने जंगल में खेती पर रोक लगा दी थी। बताया जाता है कि इसके बाद भी कई जगहों पर खेती की जा रही थी। इसे लेकर जंगलात के अफसर भी आंख बंद किए हुए थे।
अब जंगल से कब्जा हटाने के बाद गुर्जरों की खेती पर शिकंजा कस दिया गया है। यहां पर खेती करने से रोक दिया है। रनसाली रेंज में प्रयास किया गया तो उसे विफल भी किया है। अतिक्रमण हटाओ अभियान के नोडल अधिकारी और मुख्य वन संरक्षक डॉ. पराग मधुकर धकाते कहते हैं कि हाईकोर्ट वर्ष-2015 में भी जंगल में खेती पर रोक लगाने का आदेश जारी कर चुका है। इसे सख्ती से लागू कराया जा रहा है।
तराई पश्चिम वन प्रभाग के डीएफओ प्रकाश आर्य, तराई केंद्रीय वन प्रभाग के प्रभागीयवनाधिकारी हिमांशु और तराई पूर्वी वन प्रभाग के एसडीओ अनिल जोशी कहते हैं कि कहते हैं कि जंगल में पूरी तरह से खेती पर रोक लगा दी गई है।
तराई पूर्वी वन प्रभाग के रनसाली रेंज के रेंजर महेंद्र रैकुनी कहते हैं कि एक जगह पर खेती की कोशिश की गई थी, जिसे विफल कर दिया है। विभाग ने 29 एकड़ भूमि पर कब्जा भी प्राप्त किया है।