बाबा तरसेम सिंह ने जहां क्षेत्र की संगत के बीच कार सेवा की मर्यादा के अनुसार धार्मिक अलख जगाने के लिए गुरुद्वारा श्री नानकमत्ता साहिब को भव्य रूप दिया। वहीं क्षेत्र की संगत के लिए स्कूल, कॉलेज के साथ ही अस्पताल का निर्माण भी कराया।
धार्मिक डेरा कार सेवा के जत्थेदार बनने के बाद बाबा तरसेम सिंह ने जहां क्षेत्र की संगत के बीच कार सेवा की मर्यादा के अनुसार धार्मिक अलख जगाने के लिए गुरुद्वारा श्री नानकमत्ता साहिब को भव्य रूप दिया। वहीं क्षेत्र की संगत के लिए स्कूल, कॉलेज के साथ ही अस्पताल का निर्माण भी कराया।
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1974 में धार्मिक डेरा कार सेवा की स्थापना बाबा हरवंश सिंह व फौजा सिंह ने गुरुद्वारा श्री नानकमत्ता साहिब की सेवा के लिए की। गुरुद्वारों की सेवा व उनको भव्य रूप देने के चलते कार सेवा का विस्तार होता चला गया।बाबा तरसेम सिंह ने संगत के सहयोग से ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री नानकमत्ता साहिब को भव्य रूप दिया। देश विदेश से आनेवाली संगत के लिए कई सराय का निर्माण कराया। कार सेवा के चलते चंपावत स्थित गुरुद्वारा रीठा साहिब, बागेश्वर स्थित गुरुद्वारा थड़ा साहिब, नानकमत्ता का प्रसिद्ध गुरुद्वारा दूधवाला कुआं, पीलीभीत, मझोला, ऐतिहासिक गुरुद्वारा सोरों, गुरुद्वारा नानक पुरी टांडा की देखरेख भी डेरा कार सेवा नानकमत्ता को मिल गई।
बाबा तरसेम सिंह ने संगत के सहयोग से सभी गुरुद्वारों का कायाकल्प कर उन्हें भव्य रूप दिया। बाबा तरसेम सिंह ने धार्मिक अलख जगाने के साथ ही संगत के बीच शिक्षा के जागरूकता लाने के लिए गुरु नानक एकेडमी व उच्च शिक्षा के लिए श्री गुरु नानक देव स्नातकोत्तर महाविद्यालय की स्थापना की।
क्षेत्र की संगत को कम खर्चे पर उत्तम स्वास्थ्य लाभ देने के लिए पंथ रतन बाबा हरबंस सिंह बाबा टहल सिंह चैरिटेबल हॉस्पिटल की स्थापना की। बाबा तरसेम सिंह क्षेत्र में होने वाले सभी धार्मिक, सामाजिक कार्यों में सहयोग करते थे।