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राज्य के खेलों में एंटी डोपिंग की ए बी सी डी तक नहीं

Fri, 23 Jan 2015 01:46 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हल्द्वानी
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देश में खेल और खिलाड़ियों के लिए डोपिंग भले ही काली साया की तरह हो, लेकिन राज्य की खेल नीति में इसे रोकने की कोई व्यवस्था नहीं है। यहां तक कि राज्य के स्पोर्ट्स स्टेडियम में ट्रेनिंग लेने वाले खिलाड़ियों को इसकी एबीसीडी तक नहीं बताई जाती है। खिलाड़ियों को डोपिंग का पता तब चलता है, जब वह अंतरराष्ट्रीय स्तर के किसी टूर्नामेंट में हिस्सा लेने के लिए कैंप में शामिल होने जाते हैं।
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प्रदेश के स्पोर्ट्स स्टेडियम राज्य निदेशालय से संचालित होते हैं। अलग-अलग स्पोर्ट्स स्टेडियम में कोच की उपलब्धता के अनुसार खेल प्रशिक्षण की व्यवस्था भी की गई है। हल्द्वानी स्पोर्ट्स स्टेडियम में इस समय वालीबाल, बास्केटबाल, फुटबाल, टेबल टेनिस, क्रिकेट, कराटे और बाक्सिंग की ट्रेनिंग दी जाती है। नियमानुसार स्टेडियम में वे ही खिलाड़ी प्रशिक्षण के लिए अपना नामांकन करा सकते हैं, जिनकी उम्र दस से 16 वर्ष के बीच हो।

ध्यान देने की बात यह है कि जिस किशोर उम्र में गलत रास्ते पर जाने की संभावना अधिक रहती है, उस उम्र में खिलाड़ियों को डोपिंग की समस्या का समाधान बताने वाला कोई नहीं है। राज्य के खेल स्टेडियम में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है, जिससे खिलाड़ियों को पता चल सके कि कौन सी दवा प्रतिबंधित शक्तिवर्धक है, कौन सी सामान्य। कितने समय पहले दवा लेने पर डोप टेस्ट में खिलाड़ी पाजीटिव नहीं होता है। राज्य स्तरीय खेल में भी किसी खिलाड़ी को ऐसी किसी जांच से नहीं गुजरना पड़ता है, जिससे उसके डोप टेस्ट में पकड़े जाने की संभावना है।
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सूत्र बताते हैं कि अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता से पहले कैंप में ही खिलाड़ियों का डोप टेस्ट होता है। वह भी उन खेलों से पहले की जांच होती है जो अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक संघ से मान्यता प्राप्त होते हैं।

स्पोर्ट्स स्टेडियम में केवल खेलों का प्रशिक्षण दिया जाता है। यहां पर डोपिंग के बारे में प्रशिक्षण देने की कोई व्यवस्था नहीं है। अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता से पहले ही कैंप में जांच होती है। -अख्तर अली, सहायक निदेशक खेल विभाग, हल्द्वानी।
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