नैनीताल। दून विवि में एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर नियुक्ति के मामले में दायर याचिका पर हाईकोर्ट ने यूजीसी, दून विवि, दूरदर्शन रांची, राजेश कुमार, बीआर आंबेडकर विवि बिहार, दून विवि के कुलपति डीके नौटियाल, कुलसचिव और उच्च शिक्षा निदेशक को तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। देहरादून निवासी शांति प्रसाद भट्ट ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दून विवि में एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर नियुक्त राजेश कुमार की नियुक्ति को चुनौती दी थी। याची का कहना था कि एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर नियुक्ति के लिए जारी विज्ञापन में कहा गया था कि आवेदक का मास कम्यूनिकेशन में पीएचडी होना जरूरी है लेकिन राजेश कुमार को इस पीएचडी के बिना ही एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर नियुक्त कर दिया गया।
याचिका में कहा गया कि राजेश कुमार दूरदर्शन रांची में ट्रांसमिशन एक्सक्यूटिव के पद पर तैनात थे। उनके पास यूजीसी के मानक के अनुसार असिस्टेंट प्रोफेसर के पद के लिए नेट और स्लेट की योग्यता भी नहीं थी। याचिका में कहा गया कि दून विवि की प्रथम स्क्रीनिंग कमेटी ने राजेश कुमार को एसोसिएट प्रोफेसर के पद के लिए अयोग्य घोषित किया था लेकिन तत्कालीन चयन कमेटी और अन्य व्यक्तियों ने उन्हें नियुक्ति दे दी। पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने यूजीसी, दून विवि, दूरदर्शन रांची, राजेश कुमार, बीआर आंबेडकर विवि बिहार, दून विवि के कुलपति डीके नौटियाल, कुलसचिव और उच्च शिक्षा निदेशक को तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।