नैनीताल। अमृतलाल नागर हिंदी साहित्य के उन श्रेष्ठ नाटककारों में से हैं जिन्होंने नाट्य साहित्य में महत्वपूर्ण स्थान हासिल किया है उनके नाटक समकालीन समाज का प्रतिबिंब हैं। तात्कालिक युग की निराशाजनक परिस्थितियों और उनके सांस्कारिक आस्थावान स्वभाव की टकराहट से नागर के नाटक प्रेरित हैं।
यह विचार बृहस्पतिवार को सुप्रसिद्ध साहित्यकार एवं सिने पटकथा लेखिका डा. अचला नागर ने पद्मभूषण अमृतलाल नागर की जन्मशताब्दी के मौके पर महादेवी वर्मा सृजनपीठ कुविवि द्वारा यूजीसी ह्यूमन रिसोर्ट डेवलपमेंट सेंटर हरमिटेज भवन में आयोजित अमृतलाल नागर की नाट्य एवं विविध साहित्य: सृजन व संदर्भ विषयक दो दिवसीय गोष्ठी का उद्घाटन मौके पर बतौर मुख्य वक्ता व्यक्त किए।
कहा कि नागर ने अपने नाट्य साहित्य में उद्देश्य व साधन का उत्कृष्ट समन्वय किया है। इनके उद्देश्य में व्यष्टि और समष्टि का, वैचारिकता और न रोचकता का तथा आस्था व स्वीकृति का समन्वय ह्दयग्राही है। इस मौके पर डा.अचला नागर ने बतौर पुत्री अपने पिता से जुड़े संस्मरण भी साझा किए।
उ.प्र. संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित वरिष्ठ रंगकर्मी व अमृतलाल नागर के नवासे संदीपन विमलकांत नागर ने कहा कि नागर के नाटकों की रचना क्लासिक स्तर की है। युगावतार उनका अत्यंत महत्वपूर्ण और सर्वाधिक मंचित नाटक है।
बात की बात, चंदन वन, चक्करदार सीढ़ियां और अंधेरा, उतार-चढ़ाव, नुक्कड़ पर नाटक अपने संरचनात्मक रूप में अद्भुत हैं। अध्यक्षीय संबोधन में डीएसबी परिसर के निदेशक प्रो.एसपीएस मेहता ने कहा कि अपने वैचारिक साहित्यिक आयोजनों के जरिए महादेवी वर्मा सृजनपीठ ने देशभर में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है।
डीएसबी परिसर के अधिष्ठाता कला संकाय प्रो.भगवान सिंह बिष्ट ने कहा कि अमृतलाल नागर की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि उन्होंने न तो परंपरा को ही नकारा और न ही आधुनिकता से मुंह मोड़ा। महादेवी वर्मा सृजनपीठ के निदेशक प्रो.देव सिंह पोखरिया ने कहा कि संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार ने साहित्य, संस्कृति, कला, इतिहास, राजनीति आदि क्षेत्रों की सात अतिविशिष्ट विभूतियों की देशभर में जन्मशताब्दी मनाने का फैसला लिया है जिसके तहत अमृतलाल नागर के लेखन की विभिन्न विधाओं पर महादेवी वर्मा सृजनपीठ द्वारा कुमाऊं मंडल के विभिन्न स्थानों में संगोष्ठियों का आयोजन किया गया।
जन्म शताब्दी परियोजना के तहत संस्कृति विभाग भारत सरकार ने पीठ परिसर रामगढ़ में नागर की स्मृति मेें राइटर्स होम के निर्माण के लिए 80 लाख रूपये की धनराशि स्वीकृति की है। संचालन पीठ के शोध अधिकारी मोहन सिंह रावत ने किया।
गोष्ठी को पूर्व प्राचार्य डा.योगेंद्र नाथ शर्मा, उत्तराखंड मुक्त विवि के हिंदी विभागाध्यक्ष डा.शशांक शुक्ला, कथाकार दिनेश कर्नाटक, उत्तराखंड भाषा संस्थान के उपसचिव डा.सुशील उपाध्याय, कुविवि की हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो.नीरजा टंडन, डा.तेजपाल सिंह, डा.शशि पांडे, डा.बसंती रौतेला, शालिनी नागर व रामकृष्ण कोठारी ने संबोधित किया। डा. लक्ष्मी धस्माना ने सरस्वती वंदना व कुलगीत प्रस्तुत किया।
तीन तलाक और हलाला बंद होना चाहिए : डॉ. अचला
नैनीताल। प्रसिद्ध फिल्म व पटकथा लेखिका डॉ. अचला नागर ने कहा कि तीन तलाक, हलाला बंद होना चाहिए। कहा कि इसे धर्म, मजहब से जोड़ना बिल्कुल गलत है। कहा कि इस मुद्दे को वह 36 साल पहले अपनी कहानी के माध्यम से जनता के बीच ले आई थी। कहा कि उन्होंने इसे तौबा कहानी के माध्यम से वर्ष 1980 में ही उठा दिया था। बाद में मशहूर फिल्म निर्देशक बीआर चोपड़ा ने उससे प्रभावित होकर निकाह फिल्म बनाई।
डॉ. नागर बृहस्पतिवार को नैनीताल में महादेवी वर्मा सृजन पीठ रामगढ़ के सहयोग से आयोजित एक संगोष्ठी में भाग लेने पहुंची थी। उन्होंने कहा कि कलम का कोई लिंग नहीं होता और न ही रचनाकार का कोई धर्म होता है उसका धर्म केवल लिखना है। कहा कि खुद महादेवी वर्मा इसके खिलाफ रही हैं।
उन्होंने कहा कि आज लेखक लिख बहुत रहे हैं लेकिन दूसरों का लिखा नहीं पढ़ रहे हैं, पढ़ने की आदत गायब हो रही है। कहा कि उनके पिता अमृतलाल नागर लिखने की धुन के पक्के थे जिस विषय पर लिखते थे उस क्षण उसी से जीते थे और उसी की खोज में निकल पड़ते थे। इस दौरान वह दूसरे विषय के बारे में सोचते तक नहीं थे। डॉ. अचला नागर ने कहा कि वर्तमान में नारी विमर्श पर काफी बातें हो रही हैं। वर्तमान नारी सशक्त, स्वावलंबी हैं। कहा कि उनके लेखन के पीछे उनके पिता अमृतलाल नागर का महत्वपूर्ण योगदान है।