हल्द्वानी। कांग्रेस के लालकुआं, कालाढूंगी और रामनगर में सीटों में बदलाव करने से पार्टी अब मुकाबले में आ गई है। सीटों में हुए मामूली बदलाव से जहां कांग्रेस ने लालकुआं, कालाढूंगी और रामनगर सीट पर बगावत के तेज होते सुरों को थामने में सफलता पाई है वहीं मुकाबले को भी रोचक और संघर्षपूर्ण बना दिया है। सीटों के फेरबदल से इतना जरूर है कि कांग्रेस यूपी के लड़की हूं, लड़ सकती हूं को फार्मूले को जिले में कायम नहीं रख सकी और जिले की एकमात्र महिला प्रत्याशी संध्या डालाकोटी को टिकट देने के बाद बाहर का रास्ता दिखा दिया।
कांग्रेस ने पहले रामनगर से हरीश रावत को टिकट दिया था लेकिन उन्हें अब लालकुआं से चुनाव मैदान में उतारा है। कालाढूंगी से टिकट पाने वाले महेंद्र पाल को अब रामनगर सीट से जंग में उतार दिया है। कालाढूंगी में वर्षों से संघर्ष कर रहे महेश शर्मा को टिकट देकर असंतोष थामने की कवायद भी हुई है। लालकुआं में संध्या डालाकोटी ने महापंचायत में अपने साथ हुए अन्याय के लिए मतदाताओं से इंसाफ मांगा है लेकिन अगर महापंचायत का यह निर्णय चुनाव मैदान तक आता है तो फिर मुकाबला और भी रोचक होगा। फिलहाल संध्या डालाकोटी ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं। उनका कहना है कि समर्थकों की जो भी राय होगी, उसी के अनुरूप वह भी काम करेंगी।
कांग्रेस ने पूर्व में जिस तरह महेश शर्मा को नजरअंदाज कर कालाढूंगी से महेंद्र पाल, लालकुआं से हरीश दुर्गापाल और हरेंद्र बोरा को नजरअंदाज कर संध्या डालाकोटी और रामनगर में रणजीत रावत को दरकिनार कर हरीश रावत को मैदान में उतारा था उससे रामनगर में रणजीत रावत, कालाढूंगी में महेश शर्मा और लालकुआं में हरीश दुर्गापाल और हरेंद्र बोरा ने एक तरह से बगावती तेवर अपना लिए थे। अब सीटों में बदलाव होने से जिले की सभी छह सीटों में कड़ा मुकाबला होने के संकेत हैं।