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छह साल के इंतजार के बाद हत्यारोपियों को मिली उम्रकैद की सजा

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हल्द्वानी। करीब छह साल पहले बरेली के भोजीपुरा निवासी कारचोबी कारीगर का शव लालकुआं क्षेत्र में रेलवे लाइन के पास पड़ा मिला था। मृतक का सिर बुरी तरह कुचला गया था। मृतक के बड़े भाई ने तीन लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। हालांकि पुलिस जांच में तीनों आरोपियों को क्लीनचिट मिल गई थी लेकिन मृतक की जेब से मिले टिकट ने पुलिस को असली हत्याभियुक्तों तक पहुंचा दिया। छह साल बाद बृहस्पतिवार को कोर्ट ने दोनों हत्याभियुक्तों को उम्रकैद की सजा सुनाई।
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उत्तर प्रदेश के बरेली जिला स्थित भोजीपुरा के गांव जटौआ निवासी मो. अयूब ने बताया कि उनका छोटा भाई मोहम्मद सलमान (20) दिल्ली मे कारचोबी का काम करता था। 5 जुलाई 2016 को सलमान ईद मनाने के लिए घर आया था। 10 जुलाई को सलमान लालकुआं जाने के लिए घर से निकला। इस बीच 11 जुलाई को लालकुआं के वन डिपो नंबर चार के सामने रेलवे ट्रैक के पास अज्ञात व्यक्ति का शव मिला। उसके सिर को पत्थर से कुचल दिया गया था जिसकी वजह से पहचान भी मुश्किल हो गई थी।
पुलिस पड़ताल के बाद मृतक की शिनाख्त मोहम्मद सलमान के रूप में हुई। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया था। मामले में मो. अयूब ने अपने गांव के ही तीन लोगों के खिलाफ हत्या का आरोप लगाते हुए लालकुआं थाने में 11 जुलाई 2016 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। हालांकि विवेचना के दौरान संलिप्तता न पाए जाने पर पुलिस ने तीनों आरोपियों को क्लीनचिट दे दी। इस बीच घटना से एक दिन पहले के बरेली सिटी रेलवे स्टेशन के सीसीटीवी की फुटेज खंगाली तो सलमान के साथ बरेली जिला स्थित भोजीपुरा के गांव जटौआ निवासी सरताज पुत्र अहमद अली दिखा।
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पुलिस ने सरताज से पूछताछ की तो उसने हत्या की बात कुबूल ली और साथ में बरेली के बिथरी चैनपुर के उमरिया गांव के रहने वाले गुलशेर उर्फ सुल्तान को भी शामिल बताया। इस पर पुलिस ने दोनों के खिलाफ केस दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया।
एक अक्तूबर 2016 को मामला कोर्ट पहुंचा। 3 जनवरी 2017 को न्यायालय में मामला विचाराधीन हुआ। मृतक के परिवार को न्याय दिलाने के लिए एडीजीसी गिरजाशंकर पांडे जुट गए। 26 मई 2022 और 4 जून 2022 को मामले में बहस हुई। अभियोजन पक्ष की ओर से 12 गवाह पेश किए गए। आठ जून को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वितीय नीलम रात्रा ने मामले में सुनवाई के बाद हत्याभियुक्त सरताज और गुलशेर उर्फ सुल्तान को उम्रकैद और पचास-पचास हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
रेलवे टिकट से मिला था सुराग
सलमान के भाई अयूब ने बताया कि जब मृतक की तलाशी ली गई तो उसके पास से एक रेलवे टिकट मिला था। टिकट बरेली सिटी स्टेशन से लालकुआं तक का था। इसके बाद परिजन और पुलिस टीम बरेली सिटी स्टेशन पहुंचे तो सीसीटीवी फुटेज में सलमान के साथ आरोपी सरताज दिखाई दिया और उसी के बाद से ही पुलिस को आरोपियों का सुराग मिला था। वहीं पुलिस को दूसरा सुराग मिलना तब शुरू हुआ जब सलमान के फोन की छानबीन की गई। जानकारी के मुताबिक आरोपी सरताज हमेशा साथी गुलशेर के फोन के माध्यम से सलमान से बात करता था।
बहन की शादी के लिए खरीदारी के लिए गया था घर से
सलमान के भाई के मुताबिक 17 जुलाई 2016 को उनकी बहन शमा की शादी थी। घर में खुशियों का माहौल था और सलमान बहन की शादी के कपड़े और खुद के कपड़े खरीदने के लिए ही घर से निकला था लेकिन वापस नहीं लौटा।
अभियोजन पक्ष बोला, अभी पूरा इंसाफ नहीं मिला
न्याय के लिए छह साल के इंतजार के बाद अभियुक्तों को सजा तो मिल गई, लेकिन अभियोजन पक्ष इससे पूरी तरह संतुष्ट नहीं है। पीड़ित मो. अयूब का आरोप है कि दोनों अभियुक्तों ने गांव के तीन लोगों के कहने पर हत्या की थी। दो लाख रुपये के लालच में वारदात को अंजाम दिया गया। घटना से पहले गांव के कुछ लोगों ने उन्हें धमकी भी दी थी कि सात दिन में उनके भाई को मार दिया जाएगा। परिजनों ने मामले में हाईकोर्ट जाने की बात कही है।
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