15 जून 1929 को महात्मा गांधी ने जिस भवन की नीव स्वयं अपने हाथों से रखी थी अब लोग वहां बैठकर महात्मा गांधी के विषय में व देश की आजादी में उनके योगदान को जान पाएंगे। जिला मुख्यालय के समीप ताकुला गांव में स्थापित गांधी मंदिर का जीर्णोद्धार होने के बाद अब यहां पुस्तकालय खोला गया है, जहां कोई भी व्यक्ति जाकर संबंधित पुस्तकें पढ़ सकता है।
बतादें कि 15 जून 1929 को महात्मा गांधी ने ताकुला में एक भवन का शिलान्यास किया था। भवन बनने के बाद गांधी जी ने 18 मई 1931 को यहां रात्रि विश्राम किया था। इसके बाद लोगों ने इस भवन का नाम गांधी मंदिर रख दिया। जहां लंबे समय तक महात्मा गांधी का चरखा व अन्य सामग्री भी रखी हुई थी। इसे देखने के लिए पर्यटक समेत कई अन्य लोग यहां पहुंचते थे। लेकिन कई वर्षों तक देखरेख के अभाव में भवन के चारों तरफ झाड़ी जम गई थी। साथ ही यह भवन क्षतिग्रस्त हो गया था।
2020 में कुमाऊं आयुक्त के निर्देशों के बाद एक कार्यदायी संस्था की ओर से गांधी मंदिर के जीर्णोद्धार का कार्य शुरू किया गया, जो 2023 में पूरा हो सका। लेकिन दोबारा देखरेख के अभाव में गांधी मंदिर परिसर में झाड़ियां जम गईं। 2024 में मामला कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत के संज्ञान में आने के बाद वह प्रशासन की टीम के साथ ताकुला पहुंच गए। जहां उन्होंने एस्ट्रो विलेज के साथ गांधी मंदिर का भी निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान गांधी मंदिर की बिगड़ी हालत को देखकर कुमाऊं आयुक्त ने अधिकारियों को फटकार लगाई। जल्द से जल्द गांधी मंदिर को किसी संस्था को सौंपने के निर्देश भी दिए।
गांधी मंदिर के व्यवस्थापक रमेश चंद्र पांडे ने बताया कि गांधी मंदिर के सौंदर्यकरण व पुस्तकालय को एक बेहतर रूप देने के लिए अभी और व्यवस्थाएं जुटाने की आवश्यक्ता है। फिलहाल कुछ पुस्तकें पुस्तकालय में रखी गई हैं, जिन्हें कोई भी यहां आकर नि:शुल्क पढ़ सकता है।