नैनीताल। नगर के अस्तित्व के लिए अहम बलियानाला का स्थायी ट्रीटमेंट होना लगभग तय हो गया है। इसके स्थायी संरक्षण की डीपीआर के लिए अधिकृत पुणे की संस्था जेन्सट्रू ने कार्ययोजना तैयार कर ली है। इस पहाड़ी में 45 डिग्री तक कटान किया जाना प्रस्तावित है जिसमें जीआईसी परिसर और हरिनगर क्षेत्र आंशिक रुप से ध्वस्त होगा। इसी पखवाड़े संस्था कमेटी के समक्ष प्रेजेंटेशन करेगी जिसके बाद इस पर अंतिम मुहर लगेगी।
नैनीताल का बलियानाला शुरू से ही भूस्खलन के लिहाज से संवेदनशील रहा है। इसकी संवेदनशीलता को देखते हुुए अंग्रेजों ने भी यहां सुरक्षा इंतजाम किए थे। बसासत बढ़ने के बाद 1980 के दशक में यहां भारी भूस्खलन की शुरुआत हुई।
बलियानाला से लगे रईस होटल परिक्षेत्र में रहने वाले कई लोगों ने घरों को छोड़ दिया। 1995 से 1999 के दौर में हुए भूस्खलन के बाद इसके संरक्षण की पहल हुई।
वर्ष 2000 के बाद करीब 13 करोड़ रुपये में इसके सुरक्षा इंतजाम हुए लेकिन फिर भूस्खलन से सभी कार्य ढह गए। 2018 में आए बड़े भूस्खलन के बाद रईस होटल को पूरा ध्वस्त किया गया।
48 से अधिक परिवारों को दुर्गापुर में पालिका आवास आवंटन और विस्थापन हुआ। तभी से अब तक हरिनगर के 60 परिवारों को बरसात में नोटिस देकर अन्यत्र भेजा जाता है।
इस बड़े भूस्खलन का मामला शासन और केंद्र सरकार तक पहुंचा। आईआईटी, वाडिया इंस्टीट्यूट, जीएसआई समेत जापानी कंपनी जायका ने इसका सर्वे किया।
दिसंबर 2021 में शासन के आदेश पर सिंचाई विभाग ने इसकी डीपीआर का ठेका पुणे की संस्था जेन्सट्रू को दिया जिसने जून पहले पखवाड़े में डीपीआर तैयार कर इसका प्रेजेंटेशन सिंचाई विभाग, कुमाऊं आयुक्त समेत शासन स्तर पर दिया। हाईकोर्ट के आदेश पर गठित हाईपावर कमेटी के समक्ष प्रेजेंटेशन के बाद इस पर अंतिम मुहर लगेगी। संवाद
इनसेट
हरिनगर के करीब 18 भवन होेंगे ध्वस्त
पुणे की संस्था के सर्वे में हरिनगर के जीआईसी मैदान और बलियानाले से सटे करीब 18 भवनों को चिह्नित किया गया है। इसके अलावा जीआईसी की वीरभट्टी मार्ग से लगे भवन को भी संवेदनशील माना गया है। अधिकारियों के मुताबिक बलिया में भूतल और काफी ऊपर तक 45 डिग्री के एंगल तक भूस्खलन से ध्वस्त है। हरिनगर और जीआईसी में भी आंशिक ध्वस्तीकरण कर इसे 45 डिग्री तक ध्वस्त किया जाना है।
डांठ से बलियानाला तक होगा ट्रीटमेंट
डीपीआर के मुताबिक तल्लीताल डांठ से लेकर बलियानाला तक पानी के बहाव के अनुरूप फाल बनाकर संरक्षण का कार्य होगा। इसके साथ ही जीयो टैक्सटाइल, एंकरिंग, नैलिंग, हाइड्रोसीडिंग तकनीक से पहाड़ी को सुदृढ़ किया जाएगा। इसके अलावा फांसी गधेरा से डांठ तक झील की दीवार की भी स्ट्रेंथनिंग की जाएगी जिससे पानी का बहाव नाले से होगा।
कोट
बलियानाला के संरक्षण के लिए शासन में बजट की पूर्व व्यवस्था है। सर्वे के बाद संस्था की ओर से रिपोर्ट तैयार की जा चुकी है। लागत का आंकलन अंतिम चरण में है। इसमें करीब 250 करोड़ खर्च का अनुमान है। हाईपावर कमेटी के समक्ष इसे भी रखा जाएगा। - केएस चौहान, ईई, सिंचाई विभाग।